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आपकी बात…जंगलों में आग की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं ?

पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, पेश है चुनींदा प्रतिक्रियाएं…

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जयपुर

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VIKAS MATHUR

Apr 29, 2024

ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ना
ग्लोबल वार्मिंग से पृथ्वी के वातावरण के समग्र तापमान में वृद्धि हो रही है। विनिर्माण की विभिन्न गतिविधियों से वातावरण में तापमान बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन भी इसका एक कारण है। ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए।
— रेणु माहेश्वरी, भीलवाड़ा
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गर्मी की शुरुआत में आग लगने की घटनाओं में तेजी
गर्मी की शुरुआत में ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं में तेजी आ जाती है। इस ऋतु में अधिकतर पेड़ों की पत्तियां सूख जाती हैं। ये सूखी हुई पत्तियां तेज हवा के कारण आपस मे टकराती हैं, फलस्वरूप तेज चिनगारियां निकलती है और सूखी हुई घास-फूस में आग लग जाती है। दूसरी ओर पतझड़ के कारण जंगलों में घास-फूस व पत्तियों के ढ़ेर लग जाते हैं। तेज गर्मी से बढ़ते तापमान के कारण इन घास-फूस के ढेरों में स्वतः ही आग लग जाती है और धीरे धीरे विकराल रूप ले लेती है। जंगलो में बढ़ते कचरे के ढेर की समय समय पर साफ-सफाई की जाए तो कुछ हद तक आग की बढ़ती घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है।"
-चूना राम बेनीवाल, बायतु, बालोतरा
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तेेजी से बदलता मौसम जंगलों में आग लगने के लिए जिम्मेदार
तेजी से बदलता मौसम जंगलों में आग लगने की घटनाओं के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। कम बारिश होना, सूखे जैसी हालात बनना तथा गर्म हवाओं यानी लू का ज्यादा चलना और भीषण गर्मी, जंगलों में आग के लिए जिम्मेदार है।
— संदीप कुमार, मधुपुर (झारखंड)
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सूख मौसम व कम बारिश की वजह से
फायर इज़ ए गुड सर्वेंट बट बैड मास्टर’ यानी आग नियंत्रित हो तो जंगल को बेहतर बना सकती है लेकिन बिगड़ जाये तो उससे काफी नुकसान होता है। ग्लोबल वॉर्मिंग और उसके दुष्प्रभावों के बीच दुनिया भर के जंगलों में आग की घटनायें बढ़ रही हैं। भारत में भी इसका स्पष्ट असर दिख रहा है। लम्बा सूखा मौसम और कम बारिश इसके पीछे एक वजह हो सकती है।
— पलक तिवारी , भोपाल मप्र
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भूमि के तापमान में परिवर्तन बढ़ा देता आग की घटनाएं
अस्थाई जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप मई माह में जंगल की भूमि का तापमान और नमी के स्तर में परिवर्तन जंगलों में आग के ख़तरे को बढ़ा देता है। समय पर जंगलों में घांस-फूस, पत्तियों और लकड़ियों की साफ-सफाई नहीं होना भी प्रमुख कारण है जो आग में घी डालने का काम करते हैं।
— पारसमल बोस, गुड़ामालानी बाड़मेर
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प्रकृति का अंधाधुंध दोहन
प्रकृति का अंधाधुंध दोहन होने से वातावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। कहीं अधिक गर्मी तो कहीं बारिश नाममात्र की हो रही है। भीषण गर्मी के कारण सूखे की स्थिति हो जाती है। जब गर्म हवाएं जब ज्वलनशील पदार्थ के संपर्क में आती हैं तो सूखे पत्तों में आग पकड़ लेती है। सूख चुके पेड़ों की टहनियां ही आपस में रगड़-रगड़कर चिंगारी पैदा कर देती हैं जो जंगल में भीषण आग का कारण बन जाती है।
— विभा गुप्ता, मैंगलोर
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कई कारक हैं जिम्मेदार
जंगलों मे आग लगने के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। जंगलों में सूखे पत्ते ईंधन का काम करते हैं। तापमान में वृद्धि और पर्याप्त आक्सीजन जंगलों में आग तेजी से फैलने लग जाती है। ग्लोबल वार्मिंग भी इसका एक अन्य कारण है।
— अशोक कुमार शर्मा, जयपुर।
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सूखे पत्तों से तेजी से फैलती है आग
जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं का कारण है गिरे हुए सूखे पत्ते और तापमान में वृद्धि। इससे आपस में घर्षण होकर जंगल में पत्तों में आग लग जाती है और वह हरे पेड़ों को नुकसान पहूंचाती है। अतः इसके लिए जंगलों की सफाई की जानी चाहिए। सूखे पत्तों को हटाकर मशीनों द्वारा अलग स्थान पर उन्हें निष्पादित किया जाना चाहिए ।अधिक से अधिक पेड़ लगाए जिससे तापमान ज्यादा नहीं बढ़े तथा सीड बाल का प्रयोग कर जगह-जगह जंगल में डालना चाहिए जिससे पेड़ बढ़े।
— सुधा दुबे, भोपाल