पाकिस्‍तान की पहली हिंदू सीनेटर बन सकती हैं कृष्‍णा कुमारी, पीपीपी की हैं प्रत्‍याशी

Mazkoor Alam

Publish: Feb, 06 2018 04:00:23 (IST) | Updated: Feb, 06 2018 04:07:57 (IST)

Pakistan
पाकिस्‍तान की पहली हिंदू सीनेटर बन सकती हैं कृष्‍णा कुमारी, पीपीपी की हैं प्रत्‍याशी

कृष्णा कुमारी बेरेनो से यूनियन काउंसिल की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्‍होंने दलित समुदाय के लिए काफी काम किया है।

इस्‍लामाबाद : पाकिस्‍तान में बदलाव की बयार देखने को मिल रही है। पाकिस्‍तान पीपुल्‍स पार्टी ने सोमवार को एक हिंदू महिला कृष्‍णा कुमारी को जेनरल सीनेट सीट के लिए नामित किया है। वह अगर चुनाव जीतती हैं तो पाकिस्‍तान की पहली हिंदू सीनेटर होंगी।

भाई के साथ पीपीपी की थी ज्‍वाइन
मालूम हो कि कृष्णा कुमारी ने अपने भाई के साथ बतौर सामाजिक कार्यकर्ता पीपीपी ज्वॉइन की थी। धीरे-धीरे वह पार्टी में सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं और उन्हें बेरेनो से यूनियन काउंसिल का अध्यक्ष बनाया गया। अपना नामांकन पत्र दाखिल करने की पूरी तैयारी कर चुकीं कृष्‍णा कहती हैं कि उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल करने की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली है।

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दलित अधिकारों के लिए किया है काफी काम
कृष्‍णा थार इलाके में हाशिए पर मौजूद समुदायों और दलित लोगों के अधिकारों के लिए काफी काम किया है। इस बारे में एक साक्षात्‍कार में कृष्णा ने बताया था कि उन्‍हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस बात का आश्वासन दिया गया था कि पिछड़े इलाकों की महिलाओं के कल्‍याण और उन्हें आगे बढ़ाने के उद्देश्य के लिए पार्टी सीनेटर के तौर पर मनोनीत करेगी।

पीपीपी महिला नेताओं को बढ़ाती रही है आगे
इससे पहले भी पाकिस्‍तान पीपुलस पार्टी महिला नेताओं को आगे करती रही है। मालूम हो कि पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो भी पीपीपी से थीं। इतना ही नहीं, पहली महिला विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और नेशनल असेंबली की पहली महिला अध्यक्ष फहमीदा मिर्जा भी पीपीपी से ही थीं।

16 साल की उम्र में हो गया विवाह
कृष्‍णा एक गरीब किसान परिवार से आती हैं। 1979 में उनका जन्‍म हुआ। उनका परिवार एक जमींदार के शोषण का भी शिकार हुआ। उनके परिवार के सदस्यों को उस जमींदार के निजी जेल में भी करीब-करीब तीन सालों तक रहना पड़ा। 16 वर्ष की उम्र में जब वह नवीं कक्षा में थीं, तभी उनका विवाह लालचंद नामक एक युवक से करा दिया गया। हालांकि इसके बाद भी उन्‍होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 2013 में उन्होंने सिंध विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में पोस्‍ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की।

स्‍वतंञता सेनानी परिवार से हैं
सिंध प्रांत के नगरपारकर जिले के थार की कृष्‍णा स्वतंत्रता सेनानी रूपलो कोहली के परिवार से आती हैं। 1857 में जब ब्रिटिश लोगों ने सिंध पर हमला किया था, तब रूपलो कोहली ने बहादुरी के साथ उनका सामना किया था।

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