Pakistan को इस्लाम पर बहस पसंद नहीं, मुस्लिम प्रोफेसर ने दूसरे सहयोगी को मारी गोली

HIGHLIGHTS

  • Muslim Professor Shot Dead Another Fellow Academic: इस्लाम धर्म पर डिबेट करने के बाद एक प्रोफेसर ने दूसरे प्रोफेसर को गोली मारकर हत्या कर दी, क्योंकि वह इस्लाम को लेकर उसके विचारों से सहमत नहीं था।
  • मृतक प्रोफेसर अहमदिया समुदाय से संबंध रखता था और पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को मुस्लमान नहीं माना जाता है।

By: Anil Kumar

Updated: 06 Oct 2020, 05:10 PM IST

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ( Pakistan ) में कट्टरपंथियों का वर्चस्व किस कदर धार्मिक मामलों पर हावी है इसके कई उदाहरण हाल के समय में देखने-सुनने को मिला है। अब एक बार फिर से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें एक मुस्लिम प्रोफेसर ने दूसरे मुस्लिम प्रोफेसर की गोली मारकर हत्या ( Muslim Professor Shot Dead ) कर दी।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक प्रोफेसर उत्तर-पश्चिमी पेशावर का रहने वाला है, जो अहमदी समुदाय से संबंध रखता है। बता दें कि पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय ( Ahmadi Community ) को मुस्लमान नहीं माना जाता है। पुलिस के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों प्रोफेसर के बीच धर्म को लेकर एक जोरदार बहस हुई, उसके अगले दिन एक प्रोफेसर की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

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पुलिस अफसर सिराज अहमद ने बताया है कि हमलावर की पहचान फारुख माद के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि मृतक प्रोफेसर नईम खट्टक अपनी कार से कॉलेज जा रहे थे, उसी समय उनकी कार पर किसी दूसरे शख्स ने फायर की। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों प्रोफेसर अलग-अलग कॉलेज में पढ़ाते थे।

पाकिस्तान में गैर मुस्लिम माने जाते हैं अहमदिया

आपको बता दें कि मृतक प्रोफेसर खट्टक अहमदिया समुदाय से आते थे। यह समुदाय प्रोफेट मोहम्मद के फॉलोवर माने जाते हैं। मिर्जा गुलाम अहमद ने इस समुदाय को 19वीं सदी में उपमहाद्वीप में बसाया था। लेकिन पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को गैर मुस्लिम माना जाता है।

1974 में पाकिस्तान की संसद ने एक कानून पास करते हुए अहमदिया समुदाय को गैर मुस्लिम घोषित किया था। तब से लेकर यह समुदाय इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर है। आए दिन अहमदिया समुदाय के साथ कई तरह के अत्याचार व अपराध की खबरें सामने आती रहती है।

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पाकिस्तान में सुन्नी आतंकियों ने अहमदिया समुदाय के पूजा स्थलों को बर्बरता के साथ कई बार तोड़ा है। इन सबको देखते हुए कई बार घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने इसकी कड़ी निंदा की है। मालूम हो कि पेशावर में सुन्नी मुस्लिमों की संख्या बहुतायत में है और यही कारण है कि यहां पर अहमदिया के साथ अत्याचार किया जाता है। सबसे बड़ी बात की प्रधानमंत्री इमरान खान भी खैबर पख्तूनख्वा से ही संबंध रखते हैं और हमेशा इनकी सुरक्षा की बात करते हैं, लेकिन अभी तक ऐसा देखने को कुछ भी नहीं मिला है।

पाकिस्तानी अहमदिया समुदाय के प्रवक्ता सलीम उद्दीन ने कहा कि खट्टक ने जूलोजी में डॉक्टरेट की थी और आस्था की वजह से उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि सरकार अहमदिया की सुरक्षा करने में नाकाम रही है।

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