ये गांव जहां न बिजली न नेटवर्क, सिर्फ ‘वादे’

- शाम होते ही सताने लगता है भय
- मजबूरी में जीवन जीने को विवश ग्रामीण

By: Suresh Hemnani

Published: 23 Jul 2021, 08:36 AM IST

पाली/मारवाड़ जंक्शन। उपखण्ड क्षेत्र का कुछ ऐसे गांव ऐसे हैं जहां पर आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी ग्रामीण बिजली की सुविधा से वंचित हैं। हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत झिझार्डी के अंतर्गत आने वाले राजस्व गांव उपरली बभाण, निचली बभाण, धारेश्वर, रामाजी का वाडिया व वरोद गांव की। जहां के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इन गांवों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए न तो बिजली के खंभे पहुंच पाए हैं और न मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध हो पाई है।

शाम होते ही सताने लगता है भय
गांव में बिजली नहीं होने के कारण शाम होते ही यहां के ग्रामीणों को भय लगने लगता है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां आए दिन जंगली जानवरों सहित जहरीले जीवों का आतंक रहता है। आए दिन यहां पर रीछ, लोमड़ी सहित अन्य जानवर देखने को मिलते हैं। कई बार आबादी क्षेत्र में भी आ जाते हैं। सांप, बिच्छु सहित अन्य जहरीले जानवरों का भी भय रहता है। शाम होने पर पूरे गांव में अंधेरा छा जाता है।

3000 से अधिक आबादी
ग्राम पंचायत झिंझार्डी के अंतर्गत आने वाले उपरली बभाण, निचली बभाण, धारेश्वर, रामाजी का वाडिया व वरोद गांव में करीब 1000 से ज्यादा घर हैं। लगभग 3000 लोगों की आबादी निवासरत है। जहां अभी तक विद्युत लाइन का विस्तार नहीं हो पाया है। शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता है।

चिमनी का सहारा
अतिआधुनिक उपरली बभाण, निचली बभाण, धारेश्वर, रामाजी का वाडिया व वरोद गांव में आज भी लोग चिमनी के सहारे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। गांव में बिजली नहीं होने के कारण यहां के ग्रामीण शाम होने पर चिमनी सहित अन्य जतन कर घरेलु काम करते हैं। लोग दिन ढलने से पहले ही अपना कार्य समाप्त कर लेते हैं। हालांकी कुछ घरों मे सौर ऊर्जा वाले उपकरण लगे हुए हैं परन्तु कई घरों में अब भी अंधेरा है।

गर्मी में हाल-बेहाल
इन गांवों में बिजली नहीं होने के कारण गर्मी में ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक हवा ही इनका सहारा है। हाथ पंखी सहित अन्य संसाधनों का उपयोग किया जाता है। सर्दी के मौसम में तो कोई परेशानी नहीं होती परन्तु गर्मी व बरसात के मौसम में काफी दिक्कतें आती हैं।

नेटवर्क का भी अभाव
गांव के नेटवर्क नहीं होने के कारण लोगों को मोबाइल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नेटवर्क के लिए ग्रामीणों को ऊंचे पहाड़ तक चढऩा पड़ता है, तब जाकर कुछ नेटवर्क मिल पाता है। ऐसे में यहां के विद्यार्थियों को कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई से भी वंचित रहना पड़ रहा है।

इन्होंने कहा...
-इन गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। इसको लेकर डिस्कॉम से इसकी एप्रुवल मंगवाई। उसके बाद एक पत्र बनाकर उपखण्ड अधिकारी के पास भिजवाया गया। उपखण्ड अधिकारी से एनओसी लेकर वन विभाग के पास भिजवाया गया है। वहीं वन विभाग से राजस्थान सरकार को भिजवाया गया है। इसको लेकर बनाई गई कमेटी का मैं सदस्य हूं। इसके लिए जल्द ही प्रयास करके इन गांवों में विद्युतीकरण करवाया जाएगा। -खुशवीरसिंह जोजावर, विधायक, मारवाड़ जंक्शन

-उपखण्ड कार्यालय से एफआरटी (वन अधिकार अधिनियम अनापत्ति प्रमाण पत्र) भेजा गया है। यहां से कोई कार्रवाई बाकी नहीं है। डिस्कॉम द्वारा भी कार्रवाई जारी है। -पुष्पाकंवर सिसोदिया, उपखण्ड अधिकारी, मारवाड़ जंक्शन

-ग्राम पंचायत क्षेत्र के इन गांवों में आज तक विद्युतीकरण नहीं हुआ है। इसके लिए सम्बंधित विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से मिलकर व पत्र देकर समस्याओं को अवगत करवाया है। उन्होंने आश्वासन दिया है की शीघ्र ही कार्य हो जाएगा। -अल्पाकंवर, सरपंच, झिंझाडी

Suresh Hemnani
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