बांगड़ अस्पताल में मरीजों के लिए बेड की मारामारी, गैलेरी में चढ़ा रहे ऑक्सीजन

- कोरोना के बढ़ रहे मरीज, इधर अस्पताल में अव्यवस्थाएं

By: Suresh Hemnani

Published: 19 Sep 2020, 09:07 AM IST

-राजेन्द्रसिंह देणोक/राजीव दवे
पाली। कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार से अस्पतालों के हालात डावांडोल हो गए हैं। चिकित्सा विभाग और अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अस्पताल में बेड पर्याप्त है लेकिन सच्चाई यह है कि मरीज को भर्ती कराने के लिए परिजनों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही हैं। कई मरीजों को बाकायदा बेड उपलब्ध होने का कहकर लौटाया जा रहा है। अस्पताल की पर्ची लेने और डॉक्टर को दिखाने से लेकर भर्ती होने तक का सफर मरीज के लिए खौफनाक साबित हो रहा है। बांगड़ अस्पताल में गुरुवार को सामने आई दो महिलाओं की तस्वीर यही हकीकत बयां रही है।

नजारा-1
जिले का सबसे बड़ा राजकीय बांगड़ अस्पताल। गुरुवार सुबह करीब साढ़े दस बजे। सांस लेने में आ रही परेशानी के कारण बाबूदेवी नाम की महिला को उसके परिजन अस्पताल के कोविड वार्ड में लाए। डॉक्टर ने जांच की और ऑक्सीजन लेवल कम पाया तो आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करने की हिदायत दी। अस्पताल का कार्मिक डॉक्टर की पर्ची और महिला को लेकर आइसोलेशन वार्ड पहुंचा, लेकिन बेड खाली नहीं मिला। महिला को सांस लेने की ज्यादा दिक्कत हुई तो उसे गैलेरी में ही ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर बिठा दिया। काफी देर बाद आइसोलेशन वार्ड से एक मरीज को डिस्चार्ज कर महिला को बेड दिया गया।

नजारा-2
करीब 10.45 बजे प्रतिभा अरोड़ा को उसके पति बांगड़ अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने आए। करीब पौन घंटे तक लाइन में खड़ा रहने के बाद उन्हें पर्ची मिल पाई। डॉक्टर के चैम्बर के बाहर पहुंचे तो लम्बी लाइन लगी थी। प्रतिभा की हालत खराब होने लगी तो पति ने डॉक्टर से पहले देखने का अनुरोध किया। डॉक्टर ने महिला की हालत देखते हुए उसे आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया। आइसोलेशन वार्ड में बेड खाली नहीं मिला। डॉक्टर ने टिकट और पर्ची पर बेड खाली नहीं होने की टिप्पणी भी लिख दी। प्रतिभा को सांस की तकलीफ बढऩे लगी तो वार्ड प्रभारी ने आइसोलेशन वार्ड की गैलेरी में ही ऑक्सीजन सिलेंडर लगा दिया। करीब डेढ़ घंटे बाद उसे मुश्किल से बेड मुहैया कराया गया।

बुजुर्ग को गैलरी में सुलाया
दोनों महिलाओं के साथ इत्तफाक में ही ऐसा नहीं, बल्कि अस्पताल के हालात ही ऐसे हैं। गुरुवार सुबह ही सांस की तकलीफ के कारण सुखसिंह नामक एक बुजुर्ग भी अस्पताल आए। उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत थी, लेकिन चिकित्सा स्टाफ ने यह कहकर लौटा दिया कि सभी सिलेंडर लगे हुए हैं। बुजुर्ग गैलरी में ही सो गए। महिलाओं के साथ हुए बर्ताव का खुलासा पत्रिका तक पहुंचने के बाद अस्पतान प्रबंधन आनन-फानन में सतर्क हुआ। आइसोलेशन वार्ड के भीतर प्रवेश पर रोक लगा दी गई और दरवाजे भी बंद करा दिए गए।

इधर, अस्पताल प्रबंधन का दावा : अस्पताल में बेड पर्याप्त
-बांगड़ अस्पताल के पीएमओ डॉ. राजेन्द्र अरोड़ा से बातचीत
सवाल : अस्पताल में बेड की कमी है?
जवाब: बांगड़ अस्पताल में बेड की कमी नहीं है। वर्तमान में यहां 129 बेड उपलब्ध है जिनमें 69 कोविड मरीजों के लिए है। ऑक्सीजन सिलेण्डर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
सवाल : बेड पर्याप्त है तो मरीजों को गैलेरी में ऑक्सीजन क्यों दी जा रही?
जवाब : बेड खाली हो रहा था। तब तक महिला को ऑक्सीजन मिलती रहे इसलिए गैलरी में बिठाया गया। ऑक्सीजन सिलेंडर की भी कोई कमी नहीं है।
सवाल : कोरोना के मरीज जिस तरह से बढ़ रहे हैं, आगे के लिए व्यवस्थाएं पर्याप्त है?
जवाब :अस्पताल को 200 बेड का कर रहे हैं। एक निजी अस्पताल भी अधिग्रहित किया है जिससे अन्य मरीजों का चैकअप वहां किया जा सके।

डेढ़ घंटे घुमाया तब मिला बेड
पत्नी की तबीयत ठीक नहीं थी। अस्पताल में डॉक्टर को चैक कराने गया। काफी देर तक पर्ची के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। बाद में बेड नहीं मिला। करीब डेढ़ घंटे तक घुमाया तब जाकर भर्ती किया गया। -अनिल अरोड़ा, पीडि़ता के पति

Suresh Hemnani Desk
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