Lock Down :चौक-हथाई सूनी, घरों में जगह बना रहे पारम्परिक खेल

- अतीत के पृष्ठों में समाए खेल फिर लोगों को सुहाने लगे

By: Suresh Hemnani

Updated: 04 Apr 2020, 12:41 PM IST

-प्रमोद श्रीमाली
पाली। भौतिक चकाचौंध एवं व्यस्त जीवन शैली के चलते एकरस हुए जीवन में फिर परंपरा के रंग घुलते नजर आ रहे हैं। हालांकि शहर कोरोना [ Corona virus ] की लड़ाई के चलते घरों में कैद है और चौक-चौबारों पर जमने वाली हथाई के नजारे खत्म हो चुके हैं। बड़े-बुजुर्ग सुबह व शाम को समय गुजारने के लिए पारंपरिक खेल [ Traditional sports ] जरूर खेलते दिखते थे, लेकिन युवाओं, महिलाओं व बच्चों के लिए ये अतीत बन चुके थे। लॉकडाउन [ Lock Down ] ने ऐसे लोगों को भी पारंपरिक खेलों के प्रति आकृष्ट किया है। दिन व रात में समय पास करने के लिए लोग चौपड़, चरभर, शतरंज व कैरम आदि के खेल खेल रहे हैं।

गृहिणियों को भा रहा चर-भर, चौपड़
घर में कहीं भी चॉक से चौकोर 16 खाने बनाकर कौडिय़ों से खेला जाने वाला यह खेल महिलाओं को भा रहा है। आशापुरा नगर निवासी शांति पटेल का कहना है कि हमारे पारंपरिक खेल मितव्ययिता के उदाहरण है और इससे हम जीवन की गति को आगे बढ़ाने एवं सुरक्षित रहने की कला भी सीखते हैं। कपड़े पर बनी चौपड़ पर भी महिलाएं हाथ आजमा रही है। मोहन नगर निवासी पारस कंवर का कहना है कि सालों पहले बचपन में जिन खेलों को खेला अब वे फिर घरों में दिखाई देने लगे हैं। इससे मनोरंजन के साथ समय का सकारात्मक उपयोग होता है।

युवाओं-बुजुर्गों में शतरंज व कैरम का क्रेज
शहर के युवा व बुजुर्ग अपना समय गुजारने के लिए पारंपरिक खेल ताश, शतरंज व कैरम खेलने में रुचि दिखा रहे हैं। राम नगर निवासी रामसुख पायक का कहना है कि कैरम के माध्यम से निशाना साधने का हुनर सीखा जा सकता है साथ ही जीवन में एक लक्ष्य होने का गुण विकसित होता है। शिवाजी नगर निवासी विकास कुमार का कहना है कि शतरंज सिर्फ मनोरंजन का साधन ही नहीं बल्कि इसमें दिमागी कसरत भी हो जाती है। लॉकडाउन के कारण घर में समय गुजारने के शतरंज सबसे बेहतर माध्यम है। शतरंज में हमें पारंपरिक युद्ध शैली का ज्ञान भी प्राप्त होता है।

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Suresh Hemnani Desk
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