नवरात्र व रमजान के त्योहार पर जेल से सद्भाव की सीख, यहां हिंदू बंदी रखेंगे व्रत तो मुस्लिम बंदी करेंगे रोजा

- शहर में भले ही माहौल गर्माया, लेकिन जेल में बंदी पेश कर रहे साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल
- आपराधिक प्रवृत्ति ने पहुंचाया जेल, अब सीख सद्भाव की
- हिंदू बंदी जल्दी उठकर बना रहे रोजेदारों का खाना, मुस्लिम बंदी भी व्रतधारियों का रख रहे ध्यान

By: Suresh Hemnani

Published: 15 Apr 2021, 08:42 AM IST

पाली। पाली जेल साम्प्रदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश कर रही है। यहां मुस्लिम बंदी रोजा रखेंगे, जबकि हिंदू बंदियों के नवरात्रा का व्रत है। हिंदू बंदी तडक़े जल्दी उठकर रोजेदार बंदियों के लिए खाना पकाएंगे, वहीं मुस्लिम बंदी व्रत करने वाले हिंदू बंदियों के लिए खाना पकाएंगे। बंदियों में हिन्दू-मुस्लिम का कोई भेद नहीं है।

आम तौर पर आपराधिक गतिविधियों को लेकर जेल की चर्चा होती है। दो दिन पूर्व ही पाली में पोस्टर विवाद को लेकर माहौल गर्माया था, लेकिन जेल में माहौल अलग ही है। नवरात्रा शुरू हो गए, इसके साथ रमजान का पवित्र माह भी है। ऐसे में इस जेल में साम्प्रदायिक सद्भाव का माहौल नजर आ रहा है।

कम जगह, दोगुने बंदी, इस बीच सद्भाव
पाली जेल की क्षमता 65 बंदियों की है। यहां क्षमता से दोगुने 130 बंदी बंद है। जगह कम होने के बावजूद नवरात्रा व रमजान के दिनों में सभी बंदी सद्भाव से रह रहे हैं। जिनके नवरात्र का व्रत है, उनका विशेष ख्याल रखा जा रहा है। रोजा करने वाले बंदियों की देखरेख का जिम्मा हिंदू बंदियों ने उठाया है।

पसंद का भी पूरा ख्याल
व्रत करने व रोजा करने वाले बंदियों के खाने के लिए उनकी पसंद का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। व्रत रखने वाले बंदी एक दिन पहले अपने खाने में पसंदीदा सब्जी के बारे में बता देते हैं। जेल प्रशासन उनकी पसंदीदा सब्जी मंगाता है। ऐसा ही रोजा करने वालों के साथ व्यवस्था की गई है।

वाकई सराहनीय
जेल में जगह कम है, बंदियों की संख्या भी अधिक है। इस त्योहार में हिंदू-मुस्लिम बंदी साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश कर रहे हैं। नवरात्र व रमजान में दोनों एक दूसरे का ख्याल रखते हुए खाना पका रहे हैं। जेल में माहौल अच्छा है, यह पहल सराहनीय है।

Suresh Hemnani
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