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साप्ताहिक बाजार में आवारा मवेशियों की मौजूदगी से बनी हादसे की आशंका, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान

बाजार को व्यवस्थित करने के लिए नहीं किए जा रहे प्रयास

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diwali celebration

पन्ना. शहर के अंदर प्रति सप्ताह रविवार को लगने वाला साप्ताहिक बाजार सालों बाद भी व्यवस्थित नहीं हो सकता है और न नगर पालिका के पास बाजार को व्यवस्थित करने की कोई योजना है। पुराना पुलिस परेड ग्राउंड , पुराना पावर हाउस मैदान और इसके आसपास करीब आधा किमी के क्षेत्र में लगने वाला बाजार में ५०० से अधिक छोटे-बड़े दुकानदार अपनी-अपनी दुकानें फुटपाथ पर लगाते हैं। यहां सब्जी मार्केट में आवारा मवेशियों के घूमते रहने से हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। गौरतलब है कि साप्ताहिक बाजार में दुकानें लगाने के लिए स्थान को लेकर हमेशा विवाद के हालात बनते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले दुकानदारों को अक्सर जगह ही नहीं मिल पाती है। सैकड़ों की संख्या में लगने वाली इन दुकानों को व्यवस्थित करने के लिए भी कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं होता है।

आए दिन बाजारों में घूमते मिल जाते हैं मवेशी
फुटपाथ पर लगी दुकानों के अलावा बड़ी संख्या में हाथ ठेला वाले पूरे मार्केट में घूूमते रहते हैं। उनके कारण हालात यह होता है कि पैदल चलना भी मुशिकल हो जाता है। आवारा मवेशी सब्जियों में मुंह मारते हैं तो दुकानदार उन्हें भगवाते हैं। ऐसे हालात में यह मवेशी तेजी से दूसरी ओर भागता है। भीड़ में जो भी इनके चपेट में आता है वह घायल हो जाता है। आवारा मवेशियों के हमले से हर सप्ताह एक-दो लोग घायल हो रहे हैं। नगर पालिका आवारा मवेशियों को नहीं रोक पा रही है।

तालाब की मेड़ पर मीट मार्केट
पन्ना पवित्र नगरी घोषित है। पवित्र नगर के नियामों के अनुसार नगर के अंदर शराब और मांस का विक्रय प्रतिबंधित है। इसके बाद भी साप्ताहिक बाजार परिसर में पुराना पावर हाउस के पीछ धरम सागर तालाब की मेड़ पर खुल में मांस और मछली आदि की बिक्री की जा रही थी। शहर में रानीगांज मोहल्ला में लाखों रुपए लागत से मीट मार्केट का निर्माण किया गया था, जहां दुकानें नहीं लगने के कारण यह असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है।

ट्रांसफार्मर के नीचे लगती है दर्जनों दुकानें
कोतवाली चौक के बाहर बिजली कंपनी का बड़ा ट्रांसफार्मर रखा हुआ है। रविवार को साप्ताहिक बाजार के दिन इसी बड़ी ट्रांसफार्मर के नीचे करीब एक दर्जन दुकानें लगती हैं। थोड़ी सी भी लापरवाही यहां बड़ी हादसे का कारण बन सकती है। जिम्मेदारों को इस दिशा में ध्यान देना जरूरी है। यहां न तो बिजली कंपनी के अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की चेतावनी लिखाई गई है और ना ही नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी लोगों को ट्रांसफार्मर के नीचे दुकानें लगाने से रोक रहे हैं।