दुनिया के सबसे कम बजट में चन्द्रमा पर पहुंचा है इंडिया — डॉ. प्रसाद

शिक्षक दिवस के मौके पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व वैज्ञानिक डॉ एम.आर.आर. प्रसाद हुए स्टूडेंट्स से रूबरू

By: Anurag Trivedi

Updated: 05 Sep 2019, 05:36 PM IST

जयपुर. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एम. आर. आर. प्रसाद गुरुवार को जयपुर में स्टूडेंट्स से रूबरू हुए। कूकस स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित 'साइंटिस्ट टॉकÓ में डॉ. प्रसाद ने कहा कि इसरो इस क्षेत्र में रिसर्च को बढावा देने के लिए रिस्पॉन्ड (स्पोन्सर्ड रिसर्च) नाम से प्रोग्राम भी चला रहा है। साथ ही भारत के विभिन्न तकनीकी संस्थानों से भी प्रोजेक्ट्स आमंत्रित किए जा रहे हैं। ये प्रोजेक्ट्स किसी एक क्षेत्र में सीमित न रह कर मल्टीडिसिप्लनरी होने चाहिए, क्योंकि वहां शोध किसी एक विषय तक सीमित नहीं है। अपने लेक्चर के दौरान उन्होंने नोवामीन, थ्रीडी मेटल प्रिन्टिंग, ऑटो रिपेयर ऑफ प्लेन एंड फोन आदि नवीनतम तकनीकों के विकास पर प्रकाश डाला। लगभग 38 वर्षों तक इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में अपनी सेवा के दौरान डॉ. प्रसाद ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं मिसाइल मैन डॉ. ए पी जे कलाम के साथ कई स्पेस प्रोजेक्ट्स साझा किए हैं।
सबसे कम बजट में चन्द्रयान पर गए हैं

चंद्रयान-2 मिशन के बारे में स्टूडेंट्स के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि इस मिशन पर भारत ने लगभग 760 करोड रूपए खर्च किए है, जो कि विश्व में सबसे कम खर्च वाला मून प्रोजेक्ट है। जिस प्लानिंग के साथ शुरुआत हो रहा है उसके बाद सब कुछ सुनियोजित तरीके से ही हो रहा है। दूसरी कक्षा में प्रवेश करने के बाद अब मैनुवर के वेग को घटाया जा रहा है, ताकि चंद्रयान सही तरीके से धीरे-धीरे चंद्रमा की सतह पर उतर सके। दो दिन बाद भारत का यह मिशन पूरी तरह सफल हो जाएगा। मिशन की उपयोगिता के बारे में उन्होंने कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर पानी एवं खनिजों की बहुतायत है, जो हमारे लिए रिसर्च एवं सवाइवल के लिए काफी महत्वपूर्ण भी है। साल 2050 तक धरती पर जनसंख्या का इतना दबाव होगा, तब हमें चंद्रमा व अन्य ग्रहों पर मानव बसावट के बारे में सोचना ही होगा। इसीलिए इस प्रकार के मिशन चलाना आवश्यक हैं।
मंगलयान और शुक्र ग्रह पर स्पेस क्राफ्ट भेजने की प्लानिंग

उन्होंने कहा कि इसरो में चंद्रयान-2 की सफलता के बाद मंगलयान और फिर शुक्र ग्रह पर अपने स्पेस क्राफ्ट भेजने की दिशा में भी काम चल रहा है। डॉ. कलाम के साथ अपने कार्य अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वे बहुआयामी कार्यशैली में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे, जिनका कहना था कि छात्रों को किसी एक विषय में अपने ज्ञान को सीमित नहीं रखना चाहिए। किसी एक विषय में आपकी डिग्री केवल आपकी नियुक्ति के काम आती है। उसके बाद आपको विविध विषयों का ज्ञान होने पर ही आप स्पेस सेंटर से जुडे शोध कार्य में सफलता प्राप्त कर सकते है। कार्यक्रम में कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. डी जी महतो, डॉ. सुनीता रावत एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. नरेश चंदनानी ने डॉ. प्रसाद को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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Anurag Trivedi Reporting
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