Farmer Protest: राजनाथ और दुष्यंत चौैटाला के बीच बातचीत, आंदोलन सुलझाने पर चर्चा

  • कृषि कानूनों को लेकर ्किसानों और सरकार के बीच नहीं हो पा रहा समझौता
  • आंदोलन को सुलझाने को लेकर राजनाथ और दुष्यंत चौटाला के बीच बातचीत

By: Mohit sharma

Updated: 12 Dec 2020, 05:55 PM IST

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों ( Farm Laws ) को लेकर केंद्र सरकार और किसानों के बीच की रार खत्म होती नजर नहीं आ रही है। केंद्र सरकार ( Central Government ) ने जहां किसी भी सूरत में कानूनों को वापस लेने से इनकार कर दिया है, वहीं किसानों ने भी आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर किसान इन काले कानूनों को वापस नहीं लेगी तो किसान अपने घरों को वापसी नहीं करेंगे। हालांकि केंद्र सरकार ने कानून वापस लेने की बजाए उनमें संशोधन करने की हामी भरी है, लेकिन किसान हैं कि बिल वापसी से कम पर तैयार नहीं हैं। किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ( BKU Leader Rakesh Tikait ) का कहना है कि जब सरकार 14 में 12 बिंदुओं को संशोधित करने पर राजी हो गई है तो इसका मतलब बिल गलत है।

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वहीं, हरियाणा में किसानों और सरकार के बीच का गतिरोध कम करने के लिए हरियाणा का उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत की। हरियाणा में भाजपा की सहयोगी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नेता और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच किसानों के मुद्दे और मौजूदा समय चल रहे आंदोलन को सुलझाने पर चर्चा हुई। दुष्यंत चौटाला ने किसानों के मुद्दों से राजनाथ सिंह को अवगत कराते हुए उसका हल निकालने के लिए जरूरी सुझाव भी दिए। दोनों नेताओं के बीच यह मीटिंग इसलिए भी अहम है कि सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को किसान संगठनों की ओर से खारिज किए जाने के बाद फिलहाल दोनों तरफ से बातचीत का सिलसिला रुका हुआ है।

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केंद्र सरकार की ओर से तैयार तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 26 नवंबर से पंजाब और हरियाणा के किसान आंदोलित है। दिल्ली सीमा पर किसानों का आंदोलन चल रहा है। दुष्यंत चौटाला की पार्टी का हरियाणा के किसानों के बीच अच्छा जनाधार माना जाता है। उनकी पार्टी के कुछ विधायक किसान आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं। दुष्यंत चौटाला पूर्व में कह चुके हैं कि किसानों की एमएसपी पर वह किसी तरह की आंच नहीं आने देंगे। अगर किसानों की एमएसपी प्रभावित हुई तो वह उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।

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