क्यों विदेशी मीडिया ने कर्नाटक चुनाव को देश का पहला वॉट्सऐप इलेक्शन बताया?

हाल के वर्षों में वॉट्सऐप बड़ा चुनावी हथियार बना है।

By: Saif Ur Rehman

Published: 16 May 2018, 10:22 AM IST

नई दिल्ली। कर्नाटक का सियासी संग्राम अपने चरम पर है। नतीजे आ चुके हैं अभी भी सियासी दांव – पेंच खेले जा रहे हैं। इस बीच फिर से फर्जी खबरों को लेकर सोशल मीडिया चर्चा में है। खासकर मैसेंजर ऐप वॉट्सऐप।कर्नाटक विधानसभा चुनाव में वॉट्सऐप की भूमिका पर विदेशी मीडिया ने इस चुनाव को देश का पहला वॉट्सऐप चुनाव तक कह दिया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार अब आप बहस और रैलियों को भूल जाइए, भारत में अब चुनाव वॉटस्ऐप पर लड़ा और जीता जा रहा है। कर्नाटक में चुनाव के दौरान दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने दावा किया था कि उनकी पहुंच 20 हजार वॉट्सऐप ग्रुप्स तक है और वो मिनटों में लाखों समर्थकों तक अपना संदेश पहुंचा सकते हैं।देखा जाए तो वॉट्सऐप का प्रयोग बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक शांति को भड़काने, नेताओं का बयान तोड़ने मरोड़ने, मजाक उड़ाने और चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने में हो ही रहा है। बता दें कि श्रीलंका और म्यांमार में भड़काऊ वॉट्सऐप मैसेज के चलते दंगे भी हुए हैं।

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क्यों वॉट्सऐप बना बड़ा चुनावी हथियार?

मीडिया रिपोर्टस में कहा गया है कि भाजपा और कांग्रेस पार्टी ने कम से कम 50 हजार वॉट्सऐप गुरुप्स बनाने का दावा किया जिसमें संदेश भेजे गए। बता दें कि भारत वॉट्सऐप का बड़ा बाजार माना जाता है। भारत में करीब 20 करोड़ लोग वॉट्सऐप का प्रयोग करते हैं। वॉट्स पर शुरू से ही भड़काऊ सूचनाओं का आदान-प्रदान किए जाते रहे हैं। डिजिटल तौर पर अशिक्षित लोग इस जाल में फंस जाते हैं। बड़े-बड़े राजनैतिक दल एक दूसरे दलों के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाते रहते हैं। गौर करने वाली बात ये है कि हाल के महीनों में फेसबुक और इंस्टाग्राम दोनों गहन जांच में आ गए हैं, साल 2016 के अमरीकी चुनाव में रूस के दखल के संबंध में अपनी भूमिका को लेकर फेसबुक जांच के दायरे में आ गया। वॉट्सऐप काफी हद तक इससे बच निकला है क्योंकि इसका उपयोग अमरीका के बाहर ज्यादा किया जाता है। भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों में लोगों को दिन में करीब 60 अरब संदेश भेजते हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ज्यादातर गतिविधि सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन दिखाई देती है, वॉट्सऐप के संदेश आम तौर पर दिखाई नहीं देते ये व्यक्तिगत संचार के तौर पर होता है। डेटा चोरी के मसले में फंसा फेसबुक अब वॉट्सऐप को इन विवादों से दूर रखने का प्रयास कर रहा है। वॉट्सऐप का कहना है कि पिछले कुछ वक्त से सियासी दल वॉट्सऐप के जरिए लोगों को ऑर्गनाइज करने का प्रयास कर रहे हैं। कर्नाटक चुनाव से कंपनी को इस बात का अंदाजा हुआ था कि चीजें कैसे काम करती हैं। कैसे क्या हो रहा है। इससे अगले वर्ष लोकसभा चुनावों के मद्देनजर भी हमें स्थिति को संभालने में सहायता मिलेगी। कंपनी का कहना है कि अगर सुरक्षा की बात है तो कंपनी वॉट्सऐप और फेसबुक दोनों ही जगहों पर यूजर्स को ब्लॉक भी कर सकती है। चूंकि वॉट्सऐप एक्जीक्यूटिव कंटेंट स्कैन नहीं कर सकते लेकिन वो फेसबुक से जुड़े वॉट्सऐप नंबरों, और प्रोफाइल फोटो को जरिए अवांछित हरकतों की पहचान कर सकती हैं।

 

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