एनकाउंटर के आंकड़ों पर फंसी बीजेपी, अब्दुल्ला बोले- एनडीए सरकार में बढ़ा आतंकवाद

उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि एनकाउंटर के आंकड़े बताते हैं कि किस तरह बीजेपी सरकार ने राज्य में आतंकवाद और हिंसा को उभरने दिया और सुरक्षा बलों को अधिक आंतकवादियों को मारने के लिए मजबूर होना पड़ा।

By: Chandra Prakash

Published: 23 Jun 2018, 01:01 PM IST

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद के उस बयान पर अब विवाद शुरू हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी सरकार आने के बाद जम्मू कश्मीर में अधिक आतंकवादी मारे गए हैं। जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि वास्तव में यह दर्शाता है कि किस तरह बीजेपी सरकार ने राज्य में आतंकवाद और हिंसा को उभरने दिया और सुरक्षा बलों को अधिक आंतकवादियों को मारने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बीजेपी को शर्मा आनी चाहिए: अब्दुल्ला

अब्दुल्ला ने टवीट् करते हुए कहा कि इन आंकड़ों को लेकर रवि शंकर प्रसाद को शर्म आनी चाहिए और सरकार को इसे उपलब्धि नहीं बताना चाहिए। उन्होंने कहा वास्तव में मंत्री महोदय यह कहानी बताना चाहते हैं कि किस तरह उनकी सरकार ने राज्य में आतंकवाद और हिंसा को दोबारा उभरने दिया और इसकी वजह से सुरक्षा बलों को अधिक आतंकवादियों को मारने के लिए मजबूर होना पड़ा। इन आंकड़ों को लेकर आपको शर्म आनी चाहिए और इसे उपलब्धि नहीं बताया जाना चाहिए।

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रविशंकर प्रसाद ने गिनाएं थे एनकाउंटर के आंकड़े

रवि शंकर प्रसाद शुक्रवार को कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के उस बयान पर प्रतिक्रिया देने आए थे। उन्होंने कहा कि केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी सरकार के सत्ता में आने के बाद सुरक्षा बलों ने अधिक आतंकवादियों को मार गिराया है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में 2012 में 72,2013 में 67,2014 में 110, 2015 में 108,2016 में 150 , 2017 में 217 और 2018 में अब तक 75 आतंकवादी सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे गए हैं। प्रसाद का कहना है कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में आतंकवाद से निपटने के लिए एनडीए और यूपीए के कार्यकाल में कितने प्रयास किए गए हैं।

गुलाम नबी आजाद ने क्या कहा था
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर गुलाम नबी आजाद ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार की दमनकारी नीति का सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को भुगतना पड़ता है। एक आतंकी को मारने के लिए 13 नागरिकों को मार दिया जाता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि हाल के आंकड़ों पर गौर करें तो सेना की कार्रवाई नागरिकों के खिलाफ ज्यादा और आंतकियों के खिलाफ कम हुई है। घाटी में हालात बिगड़ने का मुख्य कारण यह है कि मोदी सरकार बातचीत करने की अपेक्षा कार्रवाई करने में ज्यादा यकीन रखती है। ऐसा लगता है कि वे हमेशा हथियार इस्तेमाल करना चाहते हैं। बता दें कि गुलाम नबी के इस बयान लश्कर ए तैयबा ने समर्थन किया है, जिस पर घमासान मचा हुआ।

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