
नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नए अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव का परिणाम आने के साथ ही प्रवीण तोगड़िया का युग समाप्त हो गया। 52 साल बाद पहली बार शनिवार को गुरुग्राम में वीएचपी के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया गया। इस दौरान तोगड़ियों के विरोध के बावजूद हिमाचल प्रदेश के पूर्व गर्वनर (विष्णु सदाशिव कोकजे) को परिषद का नया अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया।
बीजेपी और संघ से नाराज थे तोगड़िया
जानकारी के अनुसार अयोध्या राम मंदिर विवाद पर संसद में कानून बनाए जाने की मांग पर अड़िग तोगड़िया लंबे से समय बीजेपी व संघ से नाराज थे। यहां तक की वह कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सार्वजनिक रूप से आलोचना कर चुके हैं। यही कारण है कि जानकार चुनाव के संभावित परिणामों को लेकर पहले से आश्वस्त नजर आ रहे थे। बता दें कि वीएचपी की स्थापना 29 अगस्त 1964 को हुई थी। इसके बाद पहली बार परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव कराया गया है। चुनाव में कुल 192 लोगों ने अपने मत का इस्तेमाल किया। इसमें से विष्णु सदाशिव कोकजे को 131 और तोगड़िया के नजदीकी राघव रेड्डी को 60 वोट पड़े। जबकि एक वोट को अवैध घोषित कर दिया गया।
दिसंबर 2017 में ही हो गया था कार्यकाल समाप्त
गौरतलब है कि वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया और वीएचपी के अध्यक्ष राघव रेड्डी का कार्यकाल पिछले साल दिसम्बर में ही समाप्त हो गया था। वीएचपी के नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए बीते 29 दिसंबर को भुवनेश्वर में संगठन के कार्यकारी बोर्ड की बैठक हुई थी। संघ के सूत्रों के अनुसार संघ के बड़े अधिकारियों के पास ये जानकारी थी कि प्रवीण तोगड़िया ने गुजरात में बीजेपी के खिलाफ कई काम किए थे, इसलिए बीजेपी हाई कमान प्रवीण तोगड़िया से काफी नाराज था।
Published on:
14 Apr 2018 05:00 pm
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