कांग्रेस के दिग्गज नेता बाहुबली अखिलेश सिंह का निधन, पार्टी सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर

कांग्रेस के दिग्गज नेता बाहुबली अखिलेश सिंह का निधन, पार्टी सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर

Akansha Singh | Publish: Aug, 20 2019 07:44:14 AM (IST) | Updated: Aug, 20 2019 08:11:18 AM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

राजधानी के पीजीआई (PGI) में लंबी बीमारी के बाद कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह (Congress leader Akhilesh Singh) का निधन हो गया।

रायबरेली. राजधानी के पीजीआई (PGI) में लंबी बीमारी के बाद कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह (Congress leader Akhilesh Singh) का निधन हो गया। निधन की खबर मिलते ही जिले में शोक की लहर है। अखिलेश सिंह (Akhilesh Singh) का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। अखिलेश सिंह कांग्रेस विधायक आदिति सिंह (Congress MLA Aditi Singh) के पिता थे। कांग्रेस नेता के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव लालूपुर लाया जाएगा। अखिलेश प्रताप सिंह (Akhilesh Pratap Singh), भारत के उत्तर प्रदेश की सोलहवीं विधानसभा सभा (VIdhan Sabha) में विधायक रहे। 2012 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव (Uttar Pradesh Legislative Assembly Election) में इन्होंने उत्तर प्रदेश की रूद्रपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र (निर्वाचन संख्या-336) से चुनाव जीता। दिनांक 31 दिसम्बर 2018 को राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाये गए। कांग्रेस पार्टी के अपने क्षेत्र में बहुत ही लोकप्रिय रहे।

रायबरेली सीट पर रहा कब्जा

रायबरेली में छह विधानसभा सीटें बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली सदर, सरेनी, ऊंचाहार और सलोन हैं। लेकिन, कांग्रेस का गढ़ होने के बावजूद वर्ष 2017 तक रायबरेली सदर सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा नहीं रहा। वजह थी ‘विधायक जी’ के नाम से मशहूर अखिलेश सिंह। बाहुबली अखिलेश सिंह क्रिमिनल बैकग्राउंड होने के बावजूद यहां की जमीन पर पकड़ रखते थे। अखिलेश सिंह का दबदबा और हनक इस सीट पर देखने को मिलती थी। वर्ष 2017 के चुनाव में अपनी गिरती सेहत और सियासी विरासत को संजोए रखने के लिए अखिलेश ने अपनी बेटी को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाकर विधानसभा भेजा। कहा जाता है कि जिले के हर ठेके-पट्टे पर उनका कमीशन तय होता था। किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए उनके आदमी को काम देना भी जरूरी था।

45 से ज्यादा मुकदमे दर्ज

अखिलेश सिंह पर 45 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं, कई मामले में वे बरी हो चुके हैं, जबकि कई केस अभी भी विचाराधीन हैं। वर्ष 1988 के मशहूर सैय्यद मोदी हत्याकांड में भी उनका नाम आया था। हत्याकांड में अखिलेश सिंह के अलावा अमेठी राजघराने के संजय सिंह और सैयद मोदी की पत्नी अमिता मोदी पर भी मुकदमा दर्ज हुआ था। साल 1990 में संजय सिंह और अमिता को बरी कर दिया गया और 1996 में अखिलेश सिंह भी बरी हो गए।

राहुल-प्रियंका से ज्यादा अखिलेश की रैलियों में जुटते थे लोग

अखिलेश सिंह इस सीट से पांच बार विधायक रहे। कई बार निर्दलीय चुने गए और वर्ष 2012 के चुनावों से पहले पीस पार्टी जॉइन की थी। अखिलेश सिंह 13 साल तक कांग्रेस से अलग रहे। इस दौरान वह गांधी परिवार को जमकर कोसते थे। कहा जाता है कि अखिलेश सिंह का खौफ ऐसा था कि कांग्रेसी उनके डर से पोस्टर भी नहीं लगा पाते थे। राहुल और प्रियंका की रैलियों से ज्यादा भीड़ उनकी सभाओं में जुटती थी। कहा ये भी जाता है कि जिस दिन राहुल और प्रियंका की जनसभा होती थी, अखिलेश उसी दिन रैली करते थे।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned