scriptAppeasement is not good for the country | देश के लिए ठीक नहीं है तुष्टिकरण, द्वापर में इसी से बिगड़ी थी व्यवस्था | Patrika News

देश के लिए ठीक नहीं है तुष्टिकरण, द्वापर में इसी से बिगड़ी थी व्यवस्था

धर्म-अध्यात्म शिविर में जैन संत प्रवीण ऋषि ने राजनेताओं को चेताया

 

रायपुर

Published: January 23, 2022 07:21:01 pm

रायपुर. जीवन में नीति और नीयत स्पष्ट और साफ होनी चाहिए। परंतु ये तुष्टिकरण और मजबूरी की समझौतावादी नीति देश की व्यवस्था बिगाड़ रही है। यह ठीक नहीं है। क्योंकि द्वापरयुग में यदि भीष्म पितामह ने पूरे जीवन तुष्टिकरण की नीति नहीं अपनाई होती और अपने सामथ्र्य का सही इस्तेमाल किया होता तो महाभारत जैसा संकट टल सकता था। क्योंकि भीष्म पितामह में इतना सामथ्र्य था कि दुर्योधन और दु:शासन जैसे उनके सामने खड़े होने का दुस्साहस कभी नहीं करते। सार यह कि यदि नदी में तेज बाढ़ आई है, तब आप सभी बच सकते हैं, जब नदी के इस पार या उस पार रहोगे। बीचोंबीच खड़े होगे तो नदी की तेज धार बहा ले जाएगी, संभलना मुश्किल हो जाएगा। यही जीवन जीने के सफर की सच्चाई है।
टैगोर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में धर्म-अध्यात्म शिविर में ये बातें जैन संत प्रवीण ऋषि ने कहीं। महाराज जीवन जीने की सीख दे रहे हैं। शनिवार को प्रवचन में कहा कि सारे समझौते मजबूरी में किए जाते हैं। सही मौका मिलते ही समझौते तोड़ दिए जाते हैं, इसलिए व्यक्ति को कभी समझौता नहीं करना चाहिए। तुष्टिकरण को सबसे बड़ी समस्या बताते हुए गुरुदेव ने कहा कि इस तुष्टिकरण ने तो सृष्टि का सारी व्यवस्था बिगाड़ दी है। बाबा साहेब ने रिजर्वेशन का कोटा बनाया, लेकिन इसे परमानेंट बनाने की बात नहीं कही थी। परंतु तुष्टिकरण की वजह से न सिर्फ यह परमानेंट हो रहा है, बल्कि डेवलप भी हो रहा है। एेसे में पता नहीं तुष्टिकरण की इस नीति के चलते भविष्य में कितने ज्वालामुखी फट पड़ेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता है।
देश के लिए ठीक नहीं है तुष्टिकरण, द्वापर में इसी से बिगड़ी थी व्यवस्था
देश के लिए ठीक नहीं है तुष्टिकरण, द्वापर में इसी से बिगड़ी थी व्यवस्था
जो परायों को भी अपना बना ले उसे जिनशासन कहते हैं
गुरुदेव ने कहा कि जो अपनों के साथ ही लड़ाई शुरू कर दे उसे महाभारत कहते हैँ। जो परायों से लड़कर अपने राज्य की स्थापन कर दे उसे रामायण कहते हैँ और जो परायों को भी अपना बना ले उसे जिनशासन कहते हैं। गुरुदेव ने कहा कि उनका एक छोटा-सा सूत्र है कि आपके घर में एक छोटा सा समवशरण बन जाए। तीर्थंकर के समवशरण में तो जन्मजात दुश्मन सांप और नेवले भी साथ बैठते हैं। धर्म कहता है कि दुश्मन को भी दोस्त बना लो। आप भी आज से यह संकल्प लें कि घर में सास, बहू या भाई-भाई का कोई झगड़ा नहीं होगा। यदि ऐसा करने में सफल हुए तो समझिए कि आपके घर में भी तीर्थंकर परमात्मा का समवशरण स्थापित हो गया है और जिस दिन हर घर में ऐसा समवशरण बन जाएगा उस दिन समस्त सृष्टि में जिन शासन की स्थापना होगी।

राजनेताओं की सोच चक्रवर्तियों जैसी नहीं
दुनिया में तीन तरह की व्यवस्था है। पहली वासुदेव की जो एक खंड पर राज करता है। अच्छे लोगों का समर्थन करता है और अच्छा बोलने वालों को बुरे लोगों से लड़ाता है। दूसरा चक्रवर्ती तो 6 खंडों पर राज करता है और सभी जगहों पर समान नियम-कानून व करंसी चलाता है। परंतु आज का शासन और राजनेताओं की सोच चक्रवर्तियों जैसी नहीं, इसलिए समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

सीएम Yogi का बड़ा ऐलान, हर परिवार के एक सदस्य को मिलेगी सरकारी नौकरीचंडीमंदिर वेस्टर्न कमांड लाए गए श्योक नदी हादसे में बचे 19 सैनिकआय से अधिक संपत्ति मामले में हरियाणा के पूर्व CM ओमप्रकाश चौटाला को 4 साल की जेल, 50 लाख रुपए जुर्माना31 मई को सत्ता के 8 साल पूरा होने पर पीएम मोदी शिमला में करेंगे रोड शो, किसानों को करेंगे संबोधितराहुल गांधी ने बीजेपी पर साधा निशाना, कहा - 'नेहरू ने लोकतंत्र की जड़ों को किया मजबूत, 8 वर्षों में भाजपा ने किया कमजोर'Renault Kiger: फैमिली के लिए बेस्ट है ये किफायती सब-कॉम्पैक्ट SUV, कम दाम में बेहतर सेफ़्टी और महज 40 पैसे/Km का मेंटनेंस खर्चIPL 2022, RR vs RCB Qualifier 2: राजस्थान ने बैंगलोर को 7 विकेट से हराया, दूसरी बार IPL फाइनल में बनाई जगहपूर्व विधायक पीसी जार्ज को बड़ी राहत, हेट स्पीच के मामले में केरल हाईकोर्ट ने इस शर्त पर दी जमानत
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.