स्वर्ण जयंती से पहले बड़ा बदलाव, गायत्री परिवार छत्तीसगढ़ जोन का अधिकार छिना

- गायत्री परिवार के मुखिया प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने भेजा पत्र
- यहां की गतिविधियों का संचालन अब शांतिकुंज हरिद्वार से होगा

By: Ashish Gupta

Published: 20 Jan 2021, 10:26 PM IST

रायपुर. अखिल भारतीय गायत्री परिवार के मुखिया के एक पत्र से छत्तीसगढ़ जोन के पदाधिकारियों में मायूसी छा गई। पत्र भेजकर यह अवगत करा दिया गया है कि अब छत्तीसगढ़ जोन का संचालन सीधे तौर पर शांतिकुंज हरिद्वार से होगा। यानी की जोन स्तर पर हरिद्वार की अनुमति के बिना कोई कार्यक्रम नहीं कर सकेंगे। यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब शांतिकुंज हरिद्वार का स्वर्ण जयंती समारोह मनाने की तैयारियां चल रही हैं। हरिद्वार के पत्र से छत्तीसगढ़ जोन के पदाधिकारी हतोत्साहित हैं और केंद्रीयकरण की वजहों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

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अभी तक शांतिकुंज हरिद्वार से गायत्री परिवार के सभी सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ जोन को मिली हुई थी। जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने जोन समन्वय को दिलीप पाणिग्रही को पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ जोन का संचालन शांतिकुंज से होने के फैसले अवगत करा दिया है। हालांकि उन्होंने भेजे पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि जोन के सभी संगठन सदस्य पहले जैसा काम करते रहेंगे, ताकि गायत्री परिवार के मुख्य उद्देश्यों को लोगों तक पहुंचाने का काम पहले जैसा जारी रखा जा सके।

कार्यालय समाप्त होने से हलचल तेज
गायत्री परिवार में छत्तीसगढ़ जोन कार्यालय समाप्त कर संचालन का पूरा केंद्र शांतिकुंज को बनाए जाने पर गायत्री परिवार संगठन के अंदर हलचल तेज हो गई है। अचानक छत्तीसगढ़ जोन के संचालन का अधिकार स्थानीय स्तर पर समाप्त करने के पीछे अंदरूनी खींचतान की वजहों को माना जा रहा है। संगठन से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि सांकरा में विश्वविद्यालय नहीं खोले जाने को लेकर यहां के पदाधिकारियों ने कड़ी आपत्ति किया था। इसके साथ ही शांतिकुंज का रुख छत्तीसगढ़ जोन को लकर बदला हुआ था।

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हतोत्साहित करने जैसा निर्णय
छत्तीसगढ़ जोन के समन्वयक दिलीप पाणिग्रही अभी तक जोन स्तर पर कार्यक्रम को देखते रहे हैं। जोन कार्यालय समाप्त किए जाने के संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि यह काफी निराश करने वाला कदम है। सदस्य काफी हतोत्साहित हुए हैं। क्योंकि अभी तक क्षेत्रीय स्तर पर गुरुदेव के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और देव संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम चलता रहा है। शांतिकुंज के केंद्रीयकरण का तरीका समझ से परे है। ऐसा गुरुदेव ने कभी नहीं सोचा था।

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Ashish Gupta Desk
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