आंध्रप्रदेश के ग्रे-हाउंड्स की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में तैनात होंगे ‘ब्लैक पैंथर’

इस विशेष कमांडो टीम के लिए अफसरों और जवानों का चयन कर लिया गया है। इनको प्रशिक्षण दिया जा रहा है

By: Deepak Sahu

Published: 22 May 2018, 11:29 AM IST

रायपुर . माओवादियों से मुकाबला करने अब ‘ब्लैक पैंथर’ जंगलों में घुसेगा। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को ‘ब्लैक पैंथर’ के गठन की जानकारी दी। यह आंध्रप्रदेश के चर्चित ग्रे-हाउंड्स की तर्ज पर छत्तीसगढ़ पुलिस की विशेष प्रशिक्षित कमांडो फोर्स होगी। बताया जा रहा है कि ब्लैक पैंथर में जिला और सशस्त्र पुलिस बल के 80 से 100 जवान रखे जाएंगे।

राज्य पुलिस के अफसरों का कहना है कि इस विशेष कमांडो टीम के लिए अफसरों और जवानों का चयन कर लिया गया है। इनको प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह दस्ता आइबी इनपुट के आधार पर माओवादियों के खिलाफ प्रदेशभर में कहीं भी कार्रवाई कर सकेगा। हमले के लिए इनको ‘हवाई’ मदद भी उपलब्ध होगी। वरिष्ठ अफसरों का कहना है कि बरसात के बाद इन जवानों को मैदान में उतार दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह अंबिकापुर में सीआरपीएफ की बस्तरिया बटालियन के दीक्षांत समारोह में शामिल होकर रायपुर पहुंचे थे।

इस बटालियन के 700 जवानों की भर्ती माओवाद प्रभावित चार जिलों सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर के युवाओं से की गई है। राजनाथ सिंह ने रायपुर में माओवादी मोर्चे के संघर्ष की भी समीक्षा की। इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह , केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा और सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह भी शामिल हुए।

जवानों की शहादत पर एक करोड़ रुपए
अंबिकापुर के पास केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के प्रशिक्षण केंद्र में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद जवानों के लिए एक करोड़ से अधिक के एक्सग्रेसिया की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जवानों के जान की भरपाई तो नहीं की जा सकती, लेकिन अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के परिजनों को अब एक करोड़ से अधिक की एक्सग्रेसिया की राशि दी जाएगी। केंद्रीय गृहमंत्री यह घोषणा एक वर्ष पहले असम में भी कर चुके हैं।

चीते की तरह फुर्तीले हैं बस्तर के युवा
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज बस्तरिया बटालियन का साहस व पराक्रम को देख मुझे विश्वास हो गया है कि अब माओवादियों की खैर नहीं। बस्तर के ये युवा चीते के तरह फुर्तीले हैं। बस्तर में माओवादियों से मुकाबला करने में हमेशा वहां की भौगोलिक स्थिति व बोली की वजह से काफी परेशानी होती थी। लेकिन अब उम्मीद है कि बस्तर शांति का टापू बनेगा।

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