चैंबर के कार्यकारी अध्यक्ष बचे धोखाधड़ी से, बैंकिंग चेक की क्लोनिंग कर 51 लाख रुपए निकालने की कोशिश

चैंबर के कार्यकारी अध्यक्ष बचे धोखाधड़ी से, बैंकिंग चेक की क्लोनिंग कर 51 लाख रुपए निकालने की कोशिश

Deepak Sahu | Updated: 04 Jan 2019, 02:30:31 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

बैंकिंग धोखाधड़ी के प्रयास के संबंध में आजाद चौक थाने में कारोबारी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में चैंबर के कार्यकारी अध्यक्ष व एफएमसीजी कारोबारी ललित जैसिंघ के खाते से गुरुवार को मुंबई में 51.50 लाख की बैंकिंग धोखाधड़ी होने बच गई। बैंकिंग धोखाधड़ी के प्रयास के संबंध में आजाद चौक थाने में कारोबारी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

दरअसल यूनियन बैंक रामसागरपारा के नाम पर जिस चेक को (चेक नं.33354409) मुंबई के कोटक महिंद्रा बैंक में अप्सरा इंटरप्राइजेस द्वारा पेश किया गया था, वह चेक उनके समता कॉलोनी स्थित ऑफिस में पड़ा हुआ है। कारोबारी ललित के मुताबिक जब उन्होंने सुबह 8.30 बजे मोबाइल में चेक प्रजेंट होने का मैसेज देखा तो दंग रह गए, क्योंकि यह चेक उन्होंने जारी ही नहीं किया है। आनन-फानन में उन्होंने यूनियन बैंक के मैनेजर को पूरी घटना की जानकारी दी, वहीं ऑफिस स्टॉफ के जरिए लिखित शिकायत बैंक को दी। तब यूनियन बैंक रामसागरपारा ने मुंबई स्थित कोटक महिंद्रा में बात करके चेक से ट्रांजेक्शन रूकवाया।

बड़ी फर्म के साथ दूसरी घटना
इससे पहले छग रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष व स्टील कारोबारी महेंद्र अग्रवाल के बैंक खाते से 8 लाख रुपए का चेक महाराष्ट्र के एक बैंक में लगाया गया था। यह चेक बैंक ऑफ बड़ौदा रायपुर का था, जबकि चेक उनके पास ऑफिस मेंं रखा हुआ था। यह चेक क्लियर हो गया और उनके खाते से 8 लाख की धोखाधड़ी हो गया। इस मामले में महेंद्र अग्रवाल ने बैंक के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी और न्याय नहीं मिल पाया।

अंतरराष्ट्रीय गिरोह की आशंका
बैकिंग फ्रॉड, एटीएम फ्रॉड के बाद अब चेकबुक और हस्ताक्षर की क्लोनिंग से कारोबारी जगत में हडक़ंप मचा हुआ है। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय गिरोह के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है, वहीं बैंक प्रबंधन की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि हस्ताक्षर के साथ हू-ब-हू चेक को प्रजेंट करना, उसके बाद मोबाइल पर चेक प्रजेंट होने का मैसेज आना यह सबूत है कि शातिर योजनाबद्ध तरीके से इस काम को अंजाम दे रहे हैं। पीडि़त कारोबारी ललित जैसिंघ ने कहा कि यदि मेरा ध्यान मोबाइल पर चेक प्रजेंट होने के मैसेज पर नहीं जाता तो 51.50 लाख की धोखाधड़ी हो जाती है। इस पर बैंक और पुलिस को गंभीरता से जांच करनी चाहिए।

मैनेजर ने कहा हो रही है क्लोनिंग
यूनियन बैंक के ब्रांच मैनेजर गजेंद्र सिंह पॉल ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद हमने तुरंत एक्शन लिया और चेक से ट्रांजेक्शन रूकवा दिया। हो सकता है कि क्लोनिंग के जरिए नकली चेक बनाया गया हो। जांच-पड़ताल में यह बात सामने आई कि चेक में बैंक का गुप्त कोड नहीं था, लिहाजा यह चेक क्लियर नहीं होता। इस घटना के बारे में बैंक प्रबंधन पर सवाल उठाना सही नहीं है। यह मामला साइबर क्राइम से जुड़ा हो सकता है।

पत्रिका व्यू.....
सेफ्टी फीचर और मजबूत करने की जरूरत
बैंकिंग फ्रॉड रोकने के लिए सभी बैंकों ने चेक ट्रांजेक्शन सिस्टम (सीटीएस) चेक की अनिवार्यता कर दी है। 1 जनवरी से सीटीएस चेक ही बैंकों द्वारा स्वीकार किया जा रहा है, लेकिन यहां पर यह सवाल उठना लाजिमी है कि इसके बाद भी बैंकिंग फ्रॉड की घटनाएं रूक नहीं रही है। सीटीएस में क्लोनिंग और फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। बैंक प्रबंधन की ओर से पहले ही यह दावा किया गया है कि सीटीएस चेक की क्लोनिंग नहीं हो सकती। इससे पहले एटीएम की क्लोनिंग की घटनाएं सामने आ चुकी है, अब चेक की क्लोनिंग की घटनाएं सामने आ रही है। इस संबंध में बैकिंग सेक्टर को चेक की सुरक्षा के लिए पहले से अधिक सुरक्षा मापदंडों के साथ तकनीकी रूप से दक्ष होने की जरूरत है, ताकि बैकिंग फ्रॉड होने से बचा जा सके।

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