असाधारन गुन रहिस किसन कन्हइया म

असाधारन गुन रहिस किसन कन्हइया म

Gulal Prasad Verma | Publish: Sep, 04 2018 07:20:08 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

बिचार

किसन कन्हइया ल भगवान के आठवां अवतार कहे जाथे। फेर, कई पइत मनखेमन पूछथें के किसन कन्हइया ह भगवान आय के नोहय। जान लेय बर चाही के भगवान होय बर का-का गुन या लक्छन होय बर चाही। राम होय या फेर किसन ,जमो ल वोकर असाधरन गुन के सेती भगवान माने गे हे। संतमन के मानना हे के ये दुनिया म उही ल भगवान माने जा सकत हे जेमा छै असाधारन गुन जरूर रहय। सुग्घर, बलवान, धनवान, गियानी, बैरागी अउ नामी। आम मनखे म ये सब गुन ह संभव नइये। का किसन कन्हइया ल भगवान माने जाय? छैवो गुन का किसन कन्हइया म रहिस हे? आवा समझिन-जानिन।
सुग्घरई - सुग्घरई कोनो ल भगवान माने के पहिली तत्व या लक्छन हो सकत हे। किसन कन्हइया मा ए गुुन ह गाड़ा-गाड़ा भराय रहिस। लाख कामदेवता एक कति त अकेल्ला किसन कन्हइया दूसर कति। किसन कन्हइया के सुग्घरई देखके कोन मोहित नइ होही। किसन कन्हइया संवरहा जरूर रहिस फेर वोकक आघू चंदा घलो फिक्का रहिस।
बल - भगवान होय के दूसर तत्व हे बल। किसन कन्हइया म बल अतका रहिस के वोकर आघू कोनो टिक नइ पात रहिस। अघासुर, बकासुर, परलंबासुर असन राक्छस ल किसन कन्हइया चुटकी म हरवा दिहिस। जेन ह छै दिन म ही पूतना असन राक्छसी के परान के पान कर दिहिस वोहा का कम बलसाली हे। कालिया नाग म नाचना आम मनखे के खेल नोहय। सात साल के अवस्था म जेन ह सात कोस पहाड़ ल सात दिन तक अपन छोटे अंगठी म धरे रहिस वोकर बल के का कहना।
गियान - किसन के गियान के आघू कोनो के गियान ठिहा नइ पाय। जेन ह सोक म परे अरजुन ल निस्काम भाव ले करम करत फल के इच्छा बर मना कर दिस अउ आत्मतत्व ल थोरिक बेरा म बता दिस वोकर ले गियानी कोन होही।
धन - भगवान होय के एक लक्छन हे धन। किसन कन्हइया करा अतका धन रहिस जेकर कोनो सीमा नइ रहिस। किसन कन्हइया ह विस्वकरमा करा ले पूरा द्वारिका ल सोना ले बनवाय रहिस। किसन कन्हैया के ससुराल ले एक सौ साठ तोला सोन रोज आय। भगवान के सोलह हजार एक सौ आठ महल अलग-अलग रानी बर रहिस।
नांव (जस) - भगवान होय के एक लक्छन हे जस। जेकर जस ह सब कोती फइले रहय वोला भगवान के स्रेनी म रखे जा सकत हे। फेर किसन कन्हइया के जस ह तो तीनो लोक म फइले रहिस। अपन जुग म किसन कन्हइया असन नांव वाला कोनो नइ रहिस हे।
बैराग - भगवान होय के एक लक्छन होथे बैराग के। किसन कन्हइया के भीतर ए गुन ह घलो भराय रहिस। हजार गोपी भगवान ल चाहय, फेर मथुरा जाय के बाद परभु ह जमो ला भुलाके अपन राजकाज म लग गे। भगवान के कइ लाख संतान होइस फेर जब जान डारिस के जादा संतान मोर कुल के नांव ल खीख कर दिही त फेर जमो के परति देखाउटी मोह ल तियाग दिस। पीपर के तरी जाके बान लगे के बहाना बनाके अपन सरीर के तियाग करिस।

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