गाड़ी चघे डोंगा, कभु डोंगा चघे गाड़ी

गाड़ी चघे डोंगा, कभु डोंगा चघे गाड़ी

Gulal Prasad Verma | Updated: 14 Jun 2019, 04:59:11 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

कहिनी

न वापारा राजिम के तिर म एकठिन बुड़ेनी नांव के नानुक गांव हे । ए पार महानदी अउ वो पार पैरी नदी। बारिस के दिन म ए गांव के खेत-खलिहान अउ गोठान बुड़ेच रहय। तेकर सेती गांव के नांव बुड़ेनी परे रहय। उही गांव म तुकाराम नांव के एकझन गौंटिया रिहिस। वोकर तिर गांव म खेत-खार, पुसतैनी मकान के अलावा राजिम अउ नवापारा म घला कारोबार रिहिस। तुकाराम बड़ दानदाता मनखे रिहिस। तेकर सेती तिर -तखार म परसिध्ध रहिस।
तुकाराम के एकझन हीरालाल नांव के बेटा रिहिस। जतका दानी तुकाराम, ततके वोकर बेटा लुटेरा। कोनो ल मदद तो दूर, बल्कि मउका मिले म बोरे बर नइ छोड़े। जुम्मेदारी आही तहन सब सीख जही सोच के हीरालाल के जवान होतेच साठ तामझाम ले गौंटिया ह बेटा के बिहाव करिस। तइहा-तइहा के बात ताय गा। संपति ल पोटारे नइ बइठे लोगनमन। जुम्मेदारी से निबरित होके गौंटिया- गउंटनिन तीरथ जातरा म निकलगे।
काम-बूता के एवज म बुड़ेनी ले नवापारा, उहां ले राजिम, राजिम ले वापिस बुड़ेनी अवई-जवई म चारेच दिन म हीरालाल सुखागे। फेर, लालची हीरालाल ल काकरो उप्पर भरोसा नइ रहय। तेकर सेती हरेक दिन अपन काम-काज के एवज म चलिच देवय। उही समे बजार म नावा-नावा सइकिल उतरिस। वो समे सइकिल ल गाड़ी कहंय। गाड़ी बड़ महंगा रहय। फेर गौंटिया के बेटा ल का कमी। बिसा डरिस। अब गाड़ी म ऐती-ओती आए-जाए म वोला बिलकुलेच नइ अखरे।
एक दिन के बात आय। मंगलू केंवट के लइका बीमार परगे। खेती-खार के दिन लकठियात रहय। बइला भंइसा उही म फदके रहय। बइला गाड़ी लानत लेगत ले देरी झन होय तेकर सेती मंगलू ह हीरालाल तिर जाके अपन लइका ल नवापारा के अस्पताल लेगे बर मदद मांगिस। मंगलू बड़ गिड़गिड़इस, फेर हीरालाल ह अभीच्चे आए हंव नवापारा ले कहिके अपन गाड़ी म बइठार के ले जाय बर मना कर दिस। लइका ल धर के रेंगत दउंड़त अस्पताल पहुंचत ले नानुक बाबू के सांस थमगे ।
कुछ दिन पाछू गौंटिया के वापिस लहुंटे के समे आगे। नवापारा तक टरेन म आए के खबर आगे। अपन बाबू अउ दई ल लाने बर हीरालाल गाड़ी बइला ल फंदवइस अउ सवांगे सइकिल म चघके नवापारा के रेलवे टेसन जाए बर बुड़ेनी ले निकलिस। नदिया म आट -पाट पानी दिखत रहय। घर के निकलिस त मउसम बने रहय। नदिया खंड़ अमरत ले घटाघोप दिस। पानी गिरव गिरव होगे। केंवटमन अपन-अपन डोंगा ल तिरिया डरिस अउ खंड़ म बांध के घर जाए के तियारी करे लगिस। वोतके बेर नदिया नाहके बर हीरालाल धमकगे।
एकझन केंवट ल पार नहकाये बर कहिथे। वो केंवट ह ए मउसम अउ हीरालाल के आदत दूनों ल देख के मना कर देथे। तभे डोंगा बांधत हीरालाल के नजर अपन गांव के केंवट मंगलू उप्पर परथे। वोला नवापारा जाय के कारन बतइस गरीब मंगलू ल बीते समे के सुरता आ जथे। जब वोहा हीरालाल तिर अपन लइका के जिनगी बचाय बर सइकिल म अपन लइका ल लेगे के गुहार करत रहिथे। एक बेर तो वोकरो मन होइस के मना कर दे। फेर, अपन गांव के दानी मनखे तुकाराम गौटिया ल कोनो परेसानी झन होय सोचके अपन डोंगा म हीरालाल ल भरे पुरा अउ खराब मउसम म नदिया पार करा देथे। हीरालल ओपार उतरके अपन ददा- दई ल टेसन ले लानथे। तब तक रझ- रझ, रझ -रझ पानी सुरू हो जथे। पानी म भीजत मंगलू केंवट गौंटियामन ल अगोरत उहीच खंड़ म खड़े रहिथे । पानी थमिस तहन पार हो जथे जम्मोझन।
खंड़ म जइसे उतरिन तइसे गौंटिया के बेटा हीरालाल सइकिल ल देखाय बर लकलकाय। सइकिल तिर पहुंच के दई-ददा ल अगोरे लागिस। गौंटिया गंउटनिन ह मंगलू केंवट ल अपन संग लेगे बर खंड़ म उतरके अगोरत रहिथे। डोंगा बांध के खंड़ म चघत मंगलू देख पारिस के वोकर डोंगा म एकठिन बड़े जिनिस लकड़ी के गोला टकरइस। जुन्ना डोंगा म टोंड़का होगे। वोमा पानी भरे लागिस । गरीब के करम फूटगे। आंखी म आंसू निकलगे। मंगलू थरथरागे। गौंटिंया मंगलू के परेसानी ल समझगे। मंगलू ल धीरज बंधावत गौंटिया ह मंगलू संग डोंगा ल खींच के खंड़ के उप्पर ले लानिस।
गरीब मंगलू के रोजी-रोटी के साधन ल वापिस खड़े करे बर डोंगा ल दुरुस्त करई तुरते जरूरी होगे। ए तिर बन नइ सकय तेकर सेती डोंगा ल गांव लेगे बर बइला गाड़ी म जोरवाय बर नउकर ल बलइस। डोंगा के दुरदसा देख परेसान-हतास मंगलू ल गौंटिया- गउंंटनिन अपन संग बइठारिस। नानुक गाड़ी तीन झन मनखे एकदमेच भरगे। डोंगा लाकामे लेगंय। तब गौंटिया ह हीरालाल ल कहिथे- सइकिल (गाड़ी) बिसाय त बने करे बेटा। ए डोंगा लए अपन गाड़ी (सइकिल) म बांध अउ गांव तक लेग। हीरालाल के अलावा अउ कोनो ल सइकिल चलाय बर आवय नइ। तेकर सेती ए हीरालाल खुदे सइकिल म डोंगा ल बांध के एकझन नउकर संग रेंगत-रेंगावत गांव तक पहुंचगे।
गांव के लोगनमन छोटे मनखे ल अराम से बइला गाड़ी म देखिन त दूसर कोती हीरालाल कस बड़े मनखे ल डोंगा ल सइकिल म लाद के मेहनत करत देखिन। गरीब ल पछीना बोहावत अउअमीर ल अराम पावत रोज देखंय। आज पूरा उलटगे। जेन गाड़ी (सइकिल) ल डोंगा चघत देखे रिहिन, लोगन आज उही डोंगा ल गाड़ी के सवारी करत देखिन। गांव के परछी म तास खेलत मनखे के बीच चरचा के बिसे बनगे के कोन ल काकर कब जरूरत पर सकत हे। करनी के सजा हीरालाल ल इही जनम म भुगते बर परगे। एक-दूसर ल समे म जरूर मदद करे बर चाही। कहत बिचारत मनखेमन के बीच 'कभु गाड़ी चघे डोंगा, कभू डोंगा चघे गाड़ी ह चरचा के बिसे बनगे।

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