मनखे के मितान होथे सांप

परब बिसेस

By: Gulal Verma

Published: 08 Aug 2019, 04:42 PM IST

हमर देस म सांपमन के 140 किसिम पाए जाथे। जेमा जादा ह जहरीला नइ होवय। मनखे के मितान बन के सांपमन ह अइसन मुसवा अउ दूसर जीव -जंतुमन ल खाये के काम करथे जेमन हर हमर देस के 15 लेे 20 प्रतिसत अनाज ल बरबाद कर देथें। दुनियाभर के हिसाब लगाय के बाद ए बात आगू आइस कि दुनियाभर के खाद्य पदार्थ म से 5 प्रतिसत हिस्सा मुसवामन ह हजम कर जाथे।
सा वन महीना के अंजोरी पाख के पंचमी के दिन नाग पंचमी तिहार माने जाथे। ये तिहार म नाग सांप के पूजा करे के रिवाज हवय। वेद पुरान अउ बिग्यान के मुताबिक सांप के जनम मनखे ल नुकसान पहुंचाय बर नइ होय हे, बल्कि सांपमन मनखे बर मितान बरोबर होथे। असली बात तो इही आय कि बिसैला सांप के डर म मनखेमन ह जम्मो किसिम के सांप ल अपन दुसमन मान लेथें। कोनो मनखे ल सांप ह तभे चाबथे जब वोला अइसे लागथे कि मोर जान ऊपर मुसीबत आ गे हे। अइसे बेरा म अपन बचाव करे खातिर सांप ह मनखे ल चाबथे। वइसे सांपमन के आदत सुनसान जगा म रहे के होथे। सांपमन के बचाव अउ खेती के फसल के संगे-संग परयावरन ल बचाय म सांप के योगदान ल देखते नागपंचमी तिहार मनाय के रिबाज सुरू होइस हवय। ए परम्परा ह हमर भारत देस के अलावा दूसर देस म तको चलन म हवय।
हमर देस ह खेती-किसानी वाला देस आए। इहां खेत अउ खेत के उपज धान, गहूं, चना ल नुकसान पहुंचइया मुसवा अउ दूसर कीरा-मकोरा ल खाय के काम सांप ह करथे। माने ए मन ल खाके हमर उपज के बचाव सांपमन करथें। ए अरथ म देखे जाय तो सांप हमर अन्नदाता होथे, काबर कि वोमन ह अन्न ल नुकसान पहुंचइया जीव-जंतुमन ल खाथे।
परयावरन संतुलन म तको सांप के जबर भूमिका होथे। आसाढ़ अउ सावन महीना म रंग- बिरंगा, किसिम-किसम के सांप देखे म मिलथे। काबर कि ए महीना म बारिस के पानी ह सांपमन के पराकिरितिक आवास (बिल, पेड़ के खोह) म भरा जाथे। अइसन दसा म सांप बिचारा बिल के बाहिर ऐती-ओती भटकत फिरथे। इही पाय के सांप चाबे के जादा घटना बरसात के महीना म होथे। ए बात ल सब झन जान लेय बर चाही कि जादातर सांप जहरीला नइ होय। ते पायके सांप ल देखते साथ मार डारे के गलत नियत ल मनखेमन ल छोड़े बर चाही।
नागपंचमी के दिन खास किसम के सपेरामन बांस ले बने पिटारी म सांप ल राखे-राखे घर-घर जाथे अउ बीन बजावत फन काढ़े सांप ल नचाथें। अइसन बेरा म नाग देवता के पूजा करत कईझिन दाई-बहिनी, ददा-भइया मन कटोरी म वोला दूध देथें।
बिग्यान के मुताबिक सांपमन दूध नइ पिअय। ते पायके सांप के संग दूध पियाए के खेल करके सपेरामन ह सांप के जान के दुसमन बन जाथे। इहू बात ल जान लेय बर चाही कि सांप देख सकथे, सूंघ सकथे फेर सुने के छमता नइ रहय। सांप के कान नइ होवय। सांप के कान के काम वोकर चमड़ी (त्वचा) ह करथे। सांपमन के चमड़ी ह कोनो भी परकार के आवाज के कंपन ल जान डरथे। बीन के अवाज म सांपमन नाचथे, इहू ह भरम आय।
हमर देस म सांपमन के 140 किसिम पाए जाथे। जेमा जादातर जहरीला नइ होवय। मनखे के मितान बन के सांपमन ह अइसन मुसवा अउ दूसर जीव- जंतु मन ल खाय के काम करथं,े जेमन ह हमर देस के 15 लेे 20 प्रतिसत अनाज ल बरबाद कर देथें। दुनियाभर के हिसाब लगाय के बाद ए बात आगू आइस कि दुनियाभर के खाद्य पदार्थ म से 5 प्रतिसत हिस्सा मुसवामन ह हजम कर जाथे। अतेक खाद्य पदार्थ म 10 करोड़ ले जादा मनखेमन ल भुखमरी ले बचाय जा सकत हे।
ए अरथ म सांप के नदाना मनखेमन बर बने बात नोहय। सांप के जहर अउ खाल खातिर सांप ल मनखेमन ह मारे के काम करत हंवय। ऐकर धंधा करइया जादातर बेपारी हमर देस के आन्ध्रप्रदेश के तंजौर नांव के जगा म हंवय। सांप के खाल ले बैग, बेल्ट, पर्स, सेंडिल अउ जहर ले कइ किसिम के औसधि बनाय जाथे।
सांपमन के रक्छा खातिर 1974 म कड़ा कानून बनाय गीस। ऐकर मुताबिक सांप ल मरई अउ वोकर खाल के धंधा करई ह जुरुम आय। अइसन काम करइया मनखेमन ल सुरता रखे बर चाही कि दुनिया म सबो परानी एक-दूसर के सुख-दुख ल बनाय खातिर बने हवय। ऐमा मनखे अउ सांप के संबंध तको सामिल हवय। ऐला भुला के कतकोझन मनखे आस्तीन के सांप बरोबर बन गे हवय अउ थोर बहुत रुपिया के लालच म सांप ल मारे के धंधा म लगे हवय। नागपंचमी के दिन नाग देवता के पूजा करत ए बात ल सुमिरे बर चाही कि सांप के बचाव खच्चित जरूरी हे।

Gulal Verma Desk
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