रफी के छत्तीसगढ़ी गीत

सुरता म

By: Gulal Verma

Published: 08 Aug 2019, 04:49 PM IST

र फी साहब हिंदी सनिमा जगत के बहुत बड़े नांव आय। जिंकर गुरतुर अउ मीठ अवाज के जादू के मोहनी म आज घलो जम्मो संगीत परेमी मनखे झूमरत रहिथें। उंकर अवाज के चरचा के बिना हिंदी सनिमा के गीत-संगीत के गोठ ह अधूरहा लागथे।
जम्मो छत्तीसगढिय़ामन भागमानी हवय के अतिक बड़े कलाकार ह हमर भाखा के गीत ल घलो अपन अवाज दे हवय। रफी साहब के अवाज म छत्तीसगढ़ी गीत सुनना अपन आप म बड गौरव के बात आय।
बछर 1965 के आसपास म जब छत्तीसगढ़ी सनिमा जगत के दादा साहेब मनु नायक ह पहिली छत्तीसगढ़ी फिलिम बनाइन त वोमे वहा हिंदी सनिमा जगत के बड़े-बड़े नामी कलाकारमन से गीत गवाय रिहिन।
'कहि देबे संदेसÓ नांव के फिलिम म रफी साहब के अवाज म तोर पैरी के झनर-झनर अउ झमकत नदिया बहिनी लागे ह जीव ल जुड़ा देथे। खास करके तोर पैरी के झनर-झनर गीत म गीत के पहिली के अलाप अउ गीत म उंकर अवाज के पाछू म दंउडत बांसरी के स्वर।
ए फिलिम म डॉ. हनुमंत नायडू के गीत अउ मलय चक्रवर्ती के सुग्घर संगीत रिहिस हे। ए फिलिम के बाद बछर 1971 म घर-द्वार नांव ले दूसर छत्तीसगढ़ी फिलिम अइस। यहू फिलिम के गाना म रफी साहब ह अपन अवाज के मंदरस घोरे हे। छत्तीसगढ़ के नामी साहित्यकार हरि ठाकुर के लिखे गीत ह जमाल सेन के संगीत म बनेच धूम मचाय रिहिस। ए फिलिम म रफी साहब के अवाज म 'गोंदा फूलगे मोर राजाÓ गाना ह बड़ सुग्घर लागथे। जेला उन बड़ मस्ती के साथ गाए हवय। ऐकर अलावा ऐमा आज अधरतिहा अउ सुन-सुन मोर मया पीरा के संगवारी रे ह घातेच मया पाइस। अतेक बछर बीते के बाद घलो सुन-सुन मोर मया पीरा के संगवारी गीत ह छत्तीसगढ़ के तीनठन नामी छत्तीसगढ़ी लोककला मंच म अपन जादू बरकरार रखे हवय। ए गीत ल जब गुनगुनाबे तब गोड़ ह थिरके लागथे।
जेन मिहनत अउ धन लगाके छत्तीसगढ़ी फिलिम ल वो समे के कलासाधकमन बनाय रिहिन वो मुताबिक फिलिम ह बेपार नइ कर पाइस। तेकर सेती छत्तीसगढ़ी सनिमा के सफर ह उही मेर थमगे। नइते अउ कतको अकन गीत आज छत्तीसगढ़ के धरोहर रतिस। रफी साहब ल उंकर पुन्यतिथि के बेरा म नमन हवय।

Gulal Verma Desk
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