चारों डहर एक्केच बात ‘जान हे त जहान हे’

का- कहिबे

By: Gulal Verma

Published: 19 Apr 2021, 04:48 PM IST

जान हे त जहान हे। इही बात सबो कोती होवत हे। इस्कूल खुलही त कतकाझन लइका जाहीं तेकर कोनो आकब नइये। कतकोन जगा स्कूल खुलिस, त कमती लइकामन गिंन। वोकर दाई-ददा के कहिना हे- ‘जान हे त जहान हे।’ परीक्छा के घलो इही हाल हे। परीक्छा के दिन-बादर आ गे। तिथि तय होगे। फेर, सबो कोती ले एक्केच आवाज आइस ‘जान हे त जहान हे।’ परीक्छा नइ होइस। ‘जनरल परमोसन’ होगे। बारहवीं के परीक्छा ल घलो आगू घुचा दिस। काबर के ‘जान हे त जहान हे।’ एक बछर लइकामन नइ पढ़हीं, परीक्छा नइ देवाहीं, त कुछु नइ हो जाय!
कोरोना के रोना सबो डहर हे। गांव म दाई-ददामन काहत हें, लइकामन के तो मजा होगे हे। दिनभर उधम मचावत हें। रात-दिन खेलई-कुदई। पढ़ई ले छुट्टी मिल गे हे। कोरोना के सेती इस्कूल का बंद होइस, लइकामन तो जइसे पढ़े पर भूला गे हें। मोबाइल म पढ़े बर कहिथें त कारटून, गेम देखे-खेले बर धर लेथें। पट्टी, कापी म लिखई ह तो जइसे पुरखा जमाना के बात होगे हे। कम्प्यूटर, मोबाइल के सेती पहिलीच ले पढ़े-लिखे लोगनमन पेन से लिखे बर छोड़ दे हें। कुछु जिनिस म दस्खत करे बर घलो सोचे लगथें, के पीछू पइत कइसे दस्खत करे रहेंव।
कतकोन लइकामन तो इहू भूला गे हें के इस्कूल जवई का होथे? लइकामन ऑनलाइन पढ़ई म मस्त हें। का पढ़थें, कतका पढ़थें, कतका समझथें उहीमन जानंय। ‘पास’ होवत हें, तेने बहुत हे! ‘भागत चोर के लंगोटी सहीं’ कहावत बरोबर कोरोनाकाल म जब इस्कूल-कालेज बंद हें, त ऑनलाइन पढ़ई ह सहीं। लइकामन पढ़त तो हें। देखते-देखत दिन ह बीत जथे, जमाना ह बदल जथे। जेन बात काली गलत लगथे, आज उही ह सहीं लागे बर धर लेथे। एक समे रिहिस जब इस्कूल म मोबाइल लेगे बर लइकामन ल मना करंय। अब कोरोना के सेती समे अइसे आ गे कि मोबाइल ह इस्कूल बन गे हे।
कतकोन लइका ल रातकुन सपना आथें के वोहा झोला म भराय कापी-किताब ल गदहा कस लाद के रेंगत-रेंगत इस्कूल जावत हें। सपना टूटते त वोला अइसे लागथे के बोझा ह उतर गे। अतकेच नइ, सरकार ह किसानमन के करजा ल उतार दिस, तइसने लइकामन ल लागथे के सरकार ह वोकरोमन के परीक्छा के बोझा ल उतार दिस।
कोरोना के सेती आज कतकोन परिवार के रोजगार छिन गे हे। काम-बुता नइ मिले से खाय-पिये के तकलीफ हे। लइका के पढ़ई ले जादा दू जुअर के जेवन के चिंता हे। जब जान हे त जहान हे, के समे म लइकामन के इस्कूल के पढ़ई छूटत हे, वोमन मोबाइल के मायाजाल म फंसत जावत हें, इस्कूल के सुरता भुलावत जावत हे। लइकामन के बने भविस्य बर पढ़ई अउ परीक्छा जरूरी हे। फेर, सौ बात के एक बात ‘जान हे त जहान हे’, त अउ का-कहिबे।

Gulal Verma Desk
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