चौमासा के दिन

बिचार

By: Gulal Verma

Published: 21 Jun 2021, 04:00 PM IST

हमर देस म चार महीना पानी बादर के होथे। जेला हमन चौमास कहिथन। चौमास लगे के पहिली गांव के हमर भाई-बहिनी मन अपन-अपन घर ल संवारे ल लग जाथे। माटी के भिथिया अउ खावा म परसा पन्ना ल लदक के वोला पानी ले बचाये के उदिम करथें। छानी के खपरा ल अल्टा -पल्टा के सुधार लेथें। जेक ले घर म पानी झन चुहय। छेना अउ चूल्हा जलाय के लकड़ी ल घर म लाके सिझो देथें। किसानमन घुरुवा के खातू ल खेत म बगराय लगथे। गांव के मनखेमन बरसात लगे के पहिलीच ले कुआं, बावली, तरिया के सफई कर लेथें। किसानमन अपन खुमरी अउ छाता ल सजो के रख लेथें।
अभी सुग्घर चौमासा के दिन आये हवय। ऊपर म करिया करिया बादर, चमकत बिजली अउ नगाड़ा जइसे बाजत बादर म नीचे के जीव टेटका, मेचका, झिंगुरामन कुलक कुलक के आनी-बानी के आवाज निकालत हें। कीरा-मकोड़ामन बिला के निकल के बरसाती मौसम के आनंद लेत चारों मुड़ा घुमत रहिंथे। चारों मुड़ा हरियर-हरियर दिखथे। किसानमन फसल बोथें। चौमासा म हमन ल अपन खानपान के बिसेस धियान रखे बर चाही। काबर के कुछु भी उल्टा-सीधा खाय ले बीमार परे के डर रहिंथे।

Gulal Verma Desk
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