तब अउ अब के मास्टर !

तब अउ अब के मास्टर !

Gulal Verma | Publish: Sep, 04 2018 07:25:47 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

का-कहिबे...

संगी! जब हमन सरकारी इस्कूल म पढ़त रहेन त मास्टरजी ह हाथ म सुटकेनी धरके हिंदी के दोहा याद करावय। थोरको कक्छा म हल्ला-गुल्ला मचय, तहां ले हाथ ल सुटकेनी से लाल कर देवय। तभो ले मास्टरजी के मन नइ भरय त वोहा हमन ल कुकरा बना दवत रहिस। अब वोइसन मास्टर कहां रहिस! इस्कूल म लइकामन ल सजा देय के नियम घलो नइ रहि गे हे।
सिरतोन! इस्कूल म जउन बड़का मास्टरजी हे, वोहा अब नइ पढ़ावय। वोकर कुरसी म छोटे मास्टरजी बइठे हे, जउन ल लइकामन के उत्पात, हल्ला-गुल्ला नजर नइ आवय। लइकामन कांही गलती करथें त मास्टरजी मुंह ल दूसर डहर कर लेथे। बड़े मास्टर ले कहिबे त वोहा कहिथे, लइकामन से नान-नान गलती हो जथे। का लइकामन ल फांसी चढ़ा देबे! अइसन दरियादिली से लइकामन के हौसला अउ बढ़ जथे। वोमन उहीच गलती ल फेर करे बर संकोच नइ करंय।
संगी! कोनो दिन अइसे नइ जावय जेन दिन मास्टरजी के स्कूल के लइकामन उतलइन नइ करत होहीं। वइसे उतलइल लइकामन भला काकर कहिना मानथें। वोमन ल मास्टरजी के कोनो भय नइये। मास्टरजी ले 'अभयदानÓ जउन मिले हे।
सिरतोन! तेकरे सेती इस्कूल के लइकामन के सैतानी बाढ़त जावत हे। आस-परोस के मनखे परेसान हें। पूरा इलाका म मास्टरजी के गांव बदनाम होवत हे। एक दिन पास-परोस के मनखेमन सिकायत करिन त मास्टरजी कहिस- जबरदस्ती हमर इस्कूल ल बदनाम करत हव। दूसर इस्कूल के लइकामन जादा सइतानी करथें। अब ऐकर बाद म कहे बर बचथेच का!
संगी! सबो ल पता हावय के सिक्छा के स्तर गिरत जावत हे। सरकार ल घलो पता चल गे हावय के पराइवेट इस्कूल के मुकाबला म सरकारी इस्कूल के का हाल हे। अब साहेबमन ये पता लगाय बर भिड़ गे हावय के आखिर सिक्छा के स्तर अतेक कइसे गिरिच? एकदम हिटलरसाही कस नियम-कानून बनावत हें। पंच-सरपंचमन ल मास्टर-मस्टरीनमन उप्पर नजर रखे बर कहत हें। इस्कूल खुले अउ बंद होय के टाइम-टेबूल घलो बदल दीन। फेर, इस्कूल के दुदरसा जस के तस हे। इस्कूल म कांही बेवस्था नइये। मंझनिया के भोजन म घलो ठिकाना नइये। लइकामन खा के बीमार परत हें। बिलकुल गाय-गरुवा कस समझ ले हें गरीब के लइकामन ल। सरकार बदलत हे, फेर सरकारी इस्कूल के रंग-ढंग, पढ़ई-लिखई नइ बदल हे। न सरकार चलइयामन सुधार कर सकत हें, न मास्टरमन सुधरत हें।
सिरतोन! मास्टरमन ल सुधारे बर नियम बनई ह तो ठीक हे, फेर सिक्छा के स्तर ल उठाय बर बहुतेच करे बर चाही। मंतरी, साहेब, नेता, बेपारी, बड़हरमन ल अपन लइकामन ल सरकारी इस्कूल म पढ़ाय बर चाही। फेर, अइसन होवत नइ दिखत हे, त अउ का-कहिबे।

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