छत्तीसगढ़ में 207 कांग्रेस नेताओं को सरकार ने बनाया पार्षद

- रायपुर नगर निगम समेत 50 निकायों में हुई एल्डरमैनों की नियुक्ति

By: Bhupesh Tripathi

Published: 18 Sep 2020, 11:49 PM IST

रायपुर. राज्य सरकार ने कांग्रेस नेताओं को थोक के भाव राजनीतिक नियुक्तियां दी हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने गुरुवार को 207 नेताओं को नगरीय निकायों में मनोनीत पार्षद नियुक्त कर दिया। यह नियुक्तियां 50 नगरीय निकायों में हुई है। इनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, चिरमिरी, रायगढ़ और रिसाली नगर निगम भी शामिल है।

नगरीय निकायों के लिए हुए आम चुनावों के बाद सरकार ने पहली बार पार्टी नेताओं को निकायों में एल्डरमैन बनाया है। इससे पहले 9 अगस्त 2019, 9 अक्टूबर 2019 और 25 अक्टूबर 2019 को जारी आदेशों कें जरिए राज्य सरकार ने 250 से अधिक नेताओं को एल्डरमैन बनाया था। क्षेत्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण यह नियुक्तियां काफी समय से रुकी हुई थीं। इनको लेकर विवाद भी सामने आते रहे हैं। जिले के प्रभारी मंत्री, क्षेत्रीय विधायक और वरिष्ठ नेताओं की अनुशंसाओं के आधार पर नियुक्तियों की यह सूची तैयार हुई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिव डहरिया की पसंद-नापसंद भी इस सूची में दिखी है। इस सूची के बाद नगरीय निकायों में राजनीतिक नियुक्तियों का काम लगभग पूरा हो चुका है।

22 पार्षदों को बदला गया
नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में 22 मनोनीत पार्षदों को बदल दिया गया है। इन पार्षदों की नियुक्ति निकाय चुनाव से पहले हुआ था। इनकी नियुक्ति को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर विवाद की स्थिति बनी थी। कई निकायों में ऐसे लोगों को पार्षद बना दिया गया था, जो संगठन से नहीं हैं। जनता कांग्रेस के कुछ लोगों के पार्षद मनोनीत होने पर स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने भारी नाराजगी जताई थी।
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दो तरह के होते हैं मनोनीत पार्षद
नगर निगम, नगर पालिकाओं में दो तरह के पार्षद होते हैं। सामान्य तौर पर पार्षद मतदाताओं द्वारा सामान्य मतदान प्रणाली से चुने जाते हैं। सरकार भी एक निश्चित अनुपात में किसी व्यक्ति को पार्षद मनोनीत कर सकती है। सिद्धांत के तौर पर ऐसा व्यक्ति कला, साहित्य, विज्ञान, लोक सेवा, खेल अथवा तकनीकी क्षेत्र का विशेषज्ञ होना चाहिए। लेकिन सामान्य तौर पर यहां राजनीतिक लाभ-हानि की दृष्टि से नियुक्तियां होती हैं।

मनोनीत पार्षद की भूमिका
मनोनीत पार्षद निकाय की सामान्य सभा में भाग ले सकता है। बहसों में हिस्सा ले सकता है। उसे मतदान का अधिकार नहीं होता। जनता द्वारा सीधे चुने गए पार्षदों की तरह उनके लिए भी पार्षद निधि की व्यवस्था है। वे उसे शहर में कहीं भी विकास कार्यों पर खर्च कर सकते हैं। वे निकाय को सलाह दे सकते हैं।

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