छत्तीसगढ़ सरकार की आपत्ति के बाद भी केंद्र ने नीलामी सूची से नहीं हटाया हसदेव की खदानों का नाम

छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) की आपत्ति के बाद भी केंद्र सरकार हरदेव अरण्य और मांड क्षेत्र की कोयला खदानों की नीलामी (Coal Block Auction 2020) को लेकर केंद्र और राज्य सरकार फिर आमने-सामने आ गए हैं।

By: Ashish Gupta

Published: 11 Jul 2020, 11:10 AM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) की आपत्ति के बाद भी केंद्र सरकार हरदेव अरण्य (Hasdeo Arany) और मांड क्षेत्र की कोयला खदानों की नीलामी (Coal Block Auction 2020) को लेकर केंद्र और राज्य सरकार फिर आमने-सामने आ गए हैं। राज्य सरकार की आपत्ति के बाद भी कोयला मंत्रालय ने गुरुवार को नीलामी वाले 41 कोल ब्लॉक का विवरण जारी किया है। इसमें छत्तीसगढ़ के 8 कोल ब्लॉक पहले ही की तरह मौजूद हैं।

बता दें कि इससे पहले केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी (Union Coal Minister Pralhad Joshi) ने कहा था, राज्य सरकार की आपत्ति के बाद छत्तीसगढ़ के स्यांग, मदनपुर नॉर्थ, मोरगा साउथ और मोरगा 2 कोल ब्लॉक को नीलामी सूची से बाहर कर दिया है। महाराष्ट्र की भी एक कोयला खदान को सूची से बाहर रखने की बात कही गई थी। गुरुवार को जारी सूची में मांड क्षेत्र की फतेहपुर ईस्ट, गारे पेल्मा 4/1, गारे पेल्मा 4/7, सयांग, हसदेव अरण्य क्षेत्र की मदनपुर नॉर्थ, मोरगा 2, विश्रामपुर क्षेत्र की शंकरपुर भटगांव 2 एक्सटेंशन और तातापानी रामकोला की सोंधिया खदान का तकनीकी विवरण मौजूद है।

केंद्र ने दिया चार लाइन का जवाब
छत्तीसगढ़ के वन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर कहते हैं, जब तक सरकार इस सूची से नाम नहीं हटाती उनके कहे पर भरोसा नहीं है। मोहम्मद अकबर ने बताया कि 20 जून को उनके पत्र के जवाब में केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी का चार लाइन का खत आया है। इसमें उन्होंने लिखा है, मंत्रालय आपकी आपत्तियों की पड़ताल कर रहा है।

1995 वर्ग किमी में लेमरू हाथी रिज़र्व
राज्य सरकार ने आपत्ति वाले पत्र भी लिखा था, छत्तीसगढ़ राज्य का मध्य-उत्तरी क्षेत्र घने वनों से आच्छादित है। इस पूरे क्षेत्र में कोयले का भी भंडार है। वर्तमान में यहां केंद्रीय, राज्य एवं निजी संस्थानों को आवंटित कई खदानों में खनन जारी है। इसी क्षेत्र में मौजूद हसदेव एवं मांड नदी के जल ग्रहण क्षेत्र में भी कोल ब्लॉकों की नीलामी प्रस्तावित है। इससे लगे 1995 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लेमरू हाथी रिजर्व प्रस्तावित है। अधिसूचना निकलने वाली है। राज्य में वनों एवं पर्यावरण की सुरक्षा तथा भविष्य में मानव हाथी द्वंद्ध की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उस क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर रोक अत्यंत आवश्यक है।

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Ashish Gupta Desk
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