Chhattisgarh महाधिवक्ता पद को लेकर सरकार में विवाद, CM भूपेश बोले- तिवारी का इस्तीफा मंजूर

Chhattisgarh महाधिवक्ता पद को लेकर सरकार में विवाद, CM भूपेश बोले- तिवारी का इस्तीफा मंजूर

Chandu Nirmalkar | Publish: May, 31 2019 09:43:49 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

राज्य सरकार (Chhattisgrh Government) के सर्वोच्च विधि अधिकारी महाधिवक्ता पद (Advocate General of Chhattisgarh) को लेकर सरकार में नया विवाद खड़ा हो गया है।

रायपुर. राज्य सरकार (Chhattisgarh Government) के सर्वोच्च विधि अधिकारी महाधिवक्ता पद (Advocate General of Chhattisgarh) को लेकर सरकार में नया विवाद खड़ा हो गया है। बस्तर (Bastar) प्रवास से लौटे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel) ने शुक्रवार को कहा, महाधिवक्ता कनक तिवारी (Kanak Tiwari) का इस्तीफा मिला है। उनके इस्तीफे (Resignation) को मंजूर कर लिया गया है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा, कनक तिवारी ने महाधिवक्ता पद की जिम्मेदारी संभालने में असमर्थता जताई है। उनकी जगह पर नई नियुक्ति भी कर ली गई है। मुख्यमंत्री ने कहा, उन्होंने जो पेशकश की है उसे स्वीकार भी कर लिया गया है। इधर पत्रिका से बातचीत में महाधिवक्ता कनक तिवारी ने कहा, जब मैंने कोई इस्तीफा दिया ही नहीं तो मुख्यमंत्री को मिला कैसे। उन्होंने कहा, मैंने कोई इस्तीफा नहीं दिया है।

 

मैं मुख्यमंत्री के साथ नहीं हूं, इसलिए वे ऐसी बात कैसे बोल रहे हैं नहीं बता पाउंगा। बता दें कि पिछले डेढ़-दो महीनों में महाधिवक्ता के इस्तीफे की चर्चा कई बार उठ चुकी है। कनक तिवारी हर बार अपने इस्तीफे का खंडन करते हैं। देर रात उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, मैं पूरी दृढ़ता से कह रहा हूं कि मैंने महाधिवक्ता पद से इस्तीफा नहीं दिया।

सत्ता संभालते ही की थी नियुक्ति
विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद 17 दिसम्बर को भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उसके तुरंत बाद राज्य के महाधिवक्ता जुगल किशोर गिल्डा ने अपना इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री ने राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा को महाधिवक्ता के चयन का जिम्मा सौंपा। लंबी बातचीत के बाद 27 दिसम्बर को इस पद पर कनक तिवारी की नियुक्ति हुई। तिवारी ने जनवरी में अपनी जिम्मेदारी संभाली।

पैरवी से खुश नहीं है सरकार!

बताया जा रहा है कि इस विवाद के पीछे सरकार की नाखुशी है। नान घोटाला, ई-टेंडरिंग घोटाला, अंतागढ़ टेप कांड जैसे कई मामलों में सरकार ने एसआईटी गठित की। आरोपियों ने एसआईटी गठन को ही चुनौती दी और राहत पाने में कामयाब रहे। पुलिस अफसरों ने इसका ठीकरा महाधिवक्ता कार्यालय पर फोड़ा। विधि प्रकोष्ठ के नेताओं ने भी उनका विरोध किया। उनका कहना था, कनक तिवारी ने पैनल में एक ऐसे वकील को रखा है जो पूर्व मंत्री राजेश मूणत का केस लड़ता है। बताया जा रहा है कि खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी महाधिवक्ता कनक तिवारी के कामकाज से निराश हैं।

सतीष चंद्र वर्मा हो सकते हैं नए एजी
उच्च पदस्थ सूत्रों की माने तो वरिष्ठ अधिवक्ता सतीष चंद्र वर्मा नए महाधिवक्ता हो सकते हैं। वर्मा अभी अतिरिक्त महाधिवक्ता हैं। बताया जा रहा है कि उनकी नियुक्ति का आदेश शनिवार तक जारी हो सकता है।

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