बिना हथियारों के लड़ रहे कोरोना की जंग, 14 हजार पीपीई किट में मिली सिर्फ 3 हजार

स्वास्थ्य शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय की खींचतान में उलझा डॉक्टरों की सुरक्षा का सामान

By: Nikesh Kumar Dewangan

Published: 07 Apr 2020, 12:33 AM IST

रायपुर. प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग कोरोना संक्रमण को लेकर कितना सजग है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि क्रय समिति के गठन के तकरीबन 8 दिनों बाद भी सीजीएमएससी को किसी भी किस्म की खरीदी के आदेश नहीं मिले हैं। राज्य सरकार ने विगत 17 और 19 मार्च को पहली बार कोरोना से संबंधित मेडिकल सामान की खऱीदी के लिए सीजीएमएससी को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन तब तक पूरे देश में कोरोना का दानव अपने पांव पसार चुका था।
स्वास्थ्य विभाग ने 5 और 18 मार्च को एचएलएन को 14 हजार पीपीई किट्स के लिए आर्डर दिए गए थे, लेकिन राज्य सरकार को केवल 3 हजार किट ही मिल पाए। सूत्रों की माने तो यह सारी गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि स्वास्थ्य सेवा निदेशालय और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच जिम्मेदार अधिकारी सामंजस्य स्थापित करने में असफल रहे। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदी के लिए दो कमेटियां बनाई गई है, जिनमें एक विशेष सचिव के नेतृत्व में काम कर रही है, दूसरी क्रय समिति 28 मार्च को बनाई गयी है जिम्मेदारी राजेश टोप्पो को दी गई है।
देरी के पीछे कारण
क्रय समिति प्रमुख राजेश टोप्पो कहते हैं कि हम किसी खरीदी का आदेश नहीं दे रहे हैं। हम स्वास्थ्य शिक्षा निदेशालय और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के डिमांड को कैबिनेट तक भेजने का काम कर रहे हैं। वे कहते हैं कि अस्थायी कमेटी का उद्देश्य है खरीदी की प्रक्रिया जल्द से जल्द करना। कमेटी अपनी ओर से कोई डिमांड सीजीएमएससी को नहीं दे रही है। इस विलंब के पीछे की वजहें जानने की कोशिश की गयी तो पता चला कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाई गई समिति को पीपीई किट और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए तीन-तीन बैठकें करनी पड़ी, तब जाकर टेक्निकल स्पेशिफिकेशन तैयार किया जा सका। क्रय समिति के एक सदस्य कहते हैं कि हम केवल टेक्निकल राय ही दे सकते हैं। दाम तय करने में ही देरी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं हमें यह मानने में कोई ऐतराज नही है कि खरीदी में अनावश्यक विलम्ब हुआ है।
भगवान भरोसे कोरोना से लड़ाई
छत्तीसगढ़ में कोरोना से लड़ाई लॉकडाउन और केंद्र सरकार के भरोसे लड़ी जा रही है। डाक्टर भयभीत हैं, स्वास्थ्यकर्मी अस्पतालों में जाने से डर रहे हैं। आलम यह है कि राज्य में डॉक्टरों की सुरक्षा केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए सुरक्षा उपायों की बदौलत हो पा रही है। जानकारी मिली है कि मार्च माह में राज्य सरकार की ओर से 81 हजार एन-95 मास्क के आदेश दिए गए थे, लेकिन उनमें से केवल 56 हजार ही मास्क उपलब्ध हो पाए। अब बार-बार पत्र लिखने के बावजूद न पीपीई किट उपलब्ध हो रहे हैं न मास्क मिल पा रहे हैं। सीजीएमएससी के एक अधिकारी बताते हैं कि हमें उम्मीद है कि वार्षिक खरीदी के अंतर्गत 5 हजार पीपीई किट हमें एक दो दिन में उपलब्ध हो जाएगा, लेकिन आपातकालीन परिस्थितियों के लिए हम नि:संदेह तैयार नहीं हैं। गौरतलब है कि आमतौर पर छत्तीसगढ़ दवा निगम अक्टूबर में वार्षिक खरीदी कर लेता है। जब दिसम्बर के अंत में वुहान में कोरोना का संक्रमण चरम पर पहुंचा और 29 जनवरी को भारत आ धमका तो ज्यादातर राज्यों ने डॉक्टरों के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरण खऱीद लिए, लेकिन छत्तीसगढ़ हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा।

क्रय समिति के प्रमुख राजेश टोप्पो ने बताया कि अभी हमें एक खरीदी के लिए डिमांड मिली है। उस पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। क्रय समिति को ख़ुद कुछ खरीदने का अधिकार नही है। हमारा काम खरीदी की प्रक्रिया को त्वरित करना है।
सीजीएमएससी महाप्रबंधक भुवनेश यादव ने बताया कि हमें जो भी आदेश मिल रहे हैं हम उन पर त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। सीजीएमएससी कोरोना संबंधित सभी डिमांड को जल्द से जल्द पूरा करेगी।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. एसएल आदिले ने बताया कि हमारे पास पांच-छह हजार किट है। हम रायपुर में ही स्थानीय स्तर पर किट की खरीदी करने जा रहे हैं। वो रोजाना 7 सौ से 8 सौ किट की सप्लाई करेगी। देरी नहीं हुई है।

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Nikesh Kumar Dewangan Desk
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