स्वैब की कोल्ड चेन मेंटेन करने में चूक से भी कोविड19 की रिपोर्ट आ सकती है नेगेटिव, माइनस 4 डिग्री रखना पड़ता है तापमान

विशेषज्ञों का कहना है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की गाइडलाइन के अनुसार जिस व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की आशंका होती है, उसके गले या नाक के अंदर से कॉटन के जरिए सैंपल लेकर उसकी जांच की जाती है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 28 May 2020, 04:18 PM IST

रायपुर. प्रदेश में कोरोना वायरस के सैंपल की आरटी पीसीआर मशीन से जांच अभी तक सिर्फ 4 जिलों में हो रही है। एम्स, रायपुर मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर तथा रायगढ़ में लैब स्थापित किया गया है। हालांकि बड़े जिलों में इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। प्रदेशभर से सैंपल का कलेक्शन कर इन्हीं 4 जिलों के लैब में पहुंचाया जाता है। सेंटरों तक सैंपल पहुंचाने में स्वास्थ्य विभाग को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।

एम्स के वॉयरलॉजिकल लैब के वैज्ञानिक और डॉक्टरों का कहना है कि स्वैब की कोल्ड चेन मेंटेन करने में चूक से भी कोविड19 की रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है। थोड़ा सा भी संदेह होने पर संदिग्ध मरीज का दोबारा स्वैब मंगाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की गाइडलाइन के अनुसार जिस व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की आशंका होती है, उसके गले या नाक के अंदर से कॉटन के जरिए सैंपल लेकर उसकी जांच की जाती है। सैंपल गले या नाक से इसलिए लिया जाता है क्योंकि कोरोना का वायरस इन्हीं जगहों पर सबसे ज्यादा सक्रिय होता है।

माइनस 4 डिग्री में रखना पड़ता है स्वैब

विशेषज्ञों का कहना है कि सैंपल के लिए जब कोई संदिग्ध आता है तो कॉटन स्वैब (एक तरह की स्टिक) जिसके सिरे पर रूई लगी होती है, को गले या नाक में डालकर नमूना लिया जाता है। इसके बाद एक तरह की शीशी (जिसे वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया कहा जाता है) में कॉटन स्वैब रखा जाता है। शीशी में मीडिया (एक तरह का विशेष तरल पदार्थ) होता है, जो वायरस को जिंदा रखता है।

शीशी को एक अन्य कंटेनर में रखने के बाद अच्छी तरह से पैक किया जाता है। जिस पर मरीज का नाम, पता आदि होता है। इसके बाद इसे छोटे प्लास्टिक की थैली (विशेष प्रकार की) में रखकर एक कांच के छोटे से जार में रखकर आईसबॉक्स में रखा जाता है। आइसबॉक्स में माइनस 4 डिग्री तापमान मेंटेन रखना पड़ता है। तापमान में कमी आने पर पूरा स्वैब खराब हो जाता है, जिससे जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने की आशंका रहती है।

2 से अधिक दिन रखने के लिए माइनस 70 डिग्री

गले और नाक से लिए स्वैब के लिए करीब-करीब समान तापमान रखना पड़ता है। गले से लिए स्वैब को यदि 5 से कम दिन रखना हो तो माइनस 4 डिग्री तापमान में रखना होता है। इससे अधिक दिन रखने के लिए माइनस 70 डिग्री तापमान की जरूरत रहती है। वहीं नाक के स्वैब को 2 से कम दिन रखना है तो तापपान 4 डिग्री तथा इससे अधिक दिनों तक रखने के लिए माइनस 70 डिग्री मेंटेन करना पड़ता है।

स्वैब की कोल्ड चेन मेंटेन रखना जरूरी होता है, नहीं तो खराब हो जाता है। यदि सैंपल की जांच कर भी लिया जाए तो रिपोर्ट नेगेटिव आने की संभावना रहती है हालांकि अभी तक एकबार भी ऐसा नहीं हुआ है। आरटी पीसीआर मशीन में लगाने से पहले पता चल जाता है कि कोल्ड चेन मेंटेन हुआ है कि नहीं।

-डॉ. अरविंद नेरल, एचओडी माइक्रोबायोलॉजी विभाग, मेडिकल कॉलेज रायपुर

इन मेडिकल कॉलेजों को लैब का इंतजार

प्रदेश के श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज भिलाई, छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बिलासपुर, चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज दुर्ग, रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रायपुर, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में लैब स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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