परिवर्तनशील समाज में मानव अधिकार की परिभाषा भी बदलती रहेगी: जिला न्यायाधीश

न्यायाधीश राम कुमार तिवारी ने कहा कि भारत के संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों के माध्यम से विभिन्न मानव अधिकारों को विधिक बल प्रदान किया है और भारत की न्यायपालिका ने इन अधिकारों के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका का हमेशा निर्वाह किया है उन्होंने कहा कि समाज में जब-जब कोई अपराध होता है तब कहीं न कहीं किसी के मानव अधिकार का हनन जरूर होता है।

रायपुर प्रत्येक मानव का यह अधिकार है कि उसे अपने मानवीय गरिमा के अनुरूप जीवन जीने का और उस गरिमा के अनुसार जीवन व्यतीत करने का पूरा अवसर मिलेगा। ऐसे अधिकार जो प्रत्येक व्यक्ति को मानव होने के नाते प्राप्त होने ही चाहिए, उन्हीं अधिकारों को ही मानव अधिकार कहा जाता है और इन अधिकारों की कोई निश्चित परिभाषा या संख्या निर्धारित नहीं की जा सकती क्योंकि परिवर्तनशील समाज में मानव अधिकार की परिभाषा भी बदलती रहेगी।
विश्व मानव अधिकार दिवस पर छत्तीसगढ़ महाविद्यालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष, जिला न्यायाधीश राम कुमार तिवारी, विशेष अतिथि सचिव उमेश कुमार उपाध्याय मौजूद रहे। अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पुष्पा कौशिक ने की। इस संपूर्ण कार्यक्रम का समन्वय महाविद्यालय की विधि विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता अग्रवाल ने किया। न्यायाधीश राम कुमार तिवारी ने कहा कि भारत के संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों के माध्यम से विभिन्न मानव अधिकारों को विधिक बल प्रदान किया है और भारत की न्यायपालिका ने इन अधिकारों के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका का हमेशा निर्वाह किया है उन्होंने कहा कि समाज में जब-जब कोई अपराध होता है तब कहीं न कहीं किसी के मानव अधिकार का हनन जरूर होता है।
डीकेएस में दिलाई गई मानव अधिकार प्रतिज्ञा
दाऊ कल्याणसिंह सुपरस्पेशलिटी (डीकेएस) हॉस्पिटल में विश्व मानव अधिकार दिवस मनाया गया। अस्पताल एवं महाविद्यालय में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों एवं अधिकारियों को मानव अधिकार के बारे में जानकारी दी गई। छात्र-छात्राओं ने मरीज व उनके परिजनों को भी मानवा अधिकार के बारे में जानकारी दी। छात्र-छात्राओं व कर्मचारियों को शासन द्वारा प्रेषित मानव अधिकार प्रतिज्ञा की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर डीकेएस के उप अधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा, प्रवीण साहू, हुलसी साहू, प्रिया तिवारी आदि मौजूद थे।
कर्तव्यों को भी समझें और आसपास के लोगों को भी जागरूक बनाएं
कुसुम ताई दाबके विधि महाविद्यालय में मानव अधिकार दिवस पर मानव अधिकार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संबंधित संगोष्ठी का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि उमेश कुमार उपाध्याय सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण थे। उपाध्याय ने मानव अधिकार के बारे में उसकी जरूरत और महत्व उसके उपयोग और दुरुपयोग की विस्तृत चर्चा छात्रों के बीच की। छात्रों को यह भी समझाया कि जब आपको अधिकार प्राप्त होते हैं तो उसके दुरुपयोग किस तरह करते हैं। इसलिए अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें और आसपास के लोगों को भी जागरूक बनाएं। विधिक सेवा प्राधिकरण के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी कि किस तरह से गरीब महिलाएं और बच्चों को विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायिक सहयोग करता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों को अपने अधिकार तो याद रहते हैं लेकिन वह अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं। स्वयं के उत्कर्ष से परिवार का, परिवार के उत्कर्ष से समाज का, समाज से राज्य का एवं राज्य से देश का विकास होता है. अत: हमें सबसे पहले स्वयं के उत्कर्ष पर ध्यान देना चाहिए।
कार्यक्रम में प्राचार्य सैयद जाकिर अली के अलावा सुधांशु शेखर शुक्ला, राजकुमार शुक्ला, राजीव शर्मा, शिशिर भंडारकर एवं डॉक्टर प्रीति सतपथी उपस्थित रहे।

Yagya Singh Thakur
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