हर बीमारी का वायरस बदलता है प्रकृति, कोरोना का स्ट्रेन-2 भी इसी का हिस्सा- एम्स निदेशक

कोरोना के नए स्ट्रेन और वैक्सीन को लेकर राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. नितिन एम नागरकर ने 'पत्रिका' के कुछ सवालों का जवाब दिया और लोगों से डरने की बजाए मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और साबुन से बार-बार हाथ धोने की अपील की।

By: Karunakant Chaubey

Published: 26 Dec 2020, 05:01 PM IST

रायपुर. प्रदेश में सितंबर-अक्टूबर की अपेक्षा कोरोना के काफी कम संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। पिछले ९ माह से कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के बाद बेसब्री से वैक्सीन का इंतजार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारियों में जुटा था, लेकिन वायरस के नए स्ट्रेन ने चिंता में डाल दिया है।

कोरोना के नए स्ट्रेन और वैक्सीन को लेकर राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. नितिन एम नागरकर ने 'पत्रिका' के कुछ सवालों का जवाब दिया और लोगों से डरने की बजाए मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और साबुन से बार-बार हाथ धोने की अपील की।

प्रश्न : कोरोना का स्ट्रेन-2 क्या है, इसका पता कैसे चलेगा?

निदेशक- किसी भी बीमारी के वायरस की प्रकृति में एक समय के बाद बदलाव आता है। ऐसे ही कोरोना वायरस में हुआ है, जिसे स्ट्रेन-2 कहा जा रहा है। यह रिसर्च का विषय है कि वायरस ने अपने आप को कितना मजबूत किया है और कितना घातक है। इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता है कि आने वाले दिनों में स्ट्रेन-3 भी दिखने को मिले। आरटी-पीसीआर जांच से सिर्फ निगेटिव या पॉजिटिव का पता चलता है, स्ट्रेन का नहीं। फिलहाल, नए स्ट्रेन के मरीजों की पहचान के लिए सैंपल वायरोलॉजी लैब पुणे भेजा जाएगा। आईसीएमआर की तरफ से यदि हमें किट और गाइडलाइन उपलब्ध कराया जाता है तो एम्स में भी जांच संभव है।

प्रश्न : स्ट्रेन-२ के मरीजों को सामान्य कोरोना संक्रमित मरीजों से अलग रखने की जरूरत है?

निदेशक- यह भी कोरोना वायरस ही है, इसलिए फिलहाल ऐसा प्रतीत नही हो रहा है, लेकिन जरूरत पड़ेगी तो इनको अलग वार्ड में रखा जाएगा। कोरोना के शुरुआती दौर में कोरोना के सभी मरीजों को एक साथ रखा जाता था, लेकिन कुछ दिनों बाद कम लक्षण वाले और गंभीर मरीजों को अलग-अलग वार्ड में व्यवस्था की गई। एम्स किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

प्रश्न: एम्स में कोरोना को लेकर क्या-क्या रिसर्च चल रही है?

निदेशक -देशभर के संस्थानों में जिस तरह रिसर्च किया जा रहा है, उसी तरह एम्स में भी विशेषज्ञ कई विषयों को लेकर रिसर्च कर रहे हैं। सर्दी-खांसी, बुखार, सांस में दिक्कत के अलावा और संक्रमित मरीज में अन्य कौन-कौन से लक्षण आ रहे हैं, एंटी वायरल ड्रग, कोविड के अलावा डेथ के अन्य कारण, पोस्ट कोविड में आने वाले मरीजों में होने वाले दिक्कतों आदि पर रिसर्च हो रहा है। धीरे-धीरे इसकी रिपोर्ट भी आने लगी है। प्लाज्मा थैरेपी से इलाज की तैयारी की जा रही थी, लेकिन आईसीएमआर ने अप्रभावी बताकर इस पर रोक लगा दी।

प्रश्न: कोरोना वैक्सीन किसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है?

निदेशक : कोरोना वैक्सीन सभी को लगाई जानी है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में सबसे ज्यादा कौन है, इस बात पर निर्भर करता है। सरकार ने इन बातों को ही ध्यान में रखकर वैक्सीन लगाने का प्लान तैयार किया है। पहले हेल्थ केयर वर्कर्स और उसके बाद अन्य को वैक्सीन लगाई जाएगी। एम्स से करीब 3500 हेल्थ वर्कर्स की सूची भेजी गई है। वैक्सीन को रखने और उसको लगाने की सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

प्रश्न : नववर्ष में मरीजों के लिए क्या नई सुविधा शुरू होगी?

निदेशक: नए साल में कैंसर मरीजों के लिए ब्रेकी थैरेपी चालू किया जाएगा। न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में फिलहाल कैंसर मरीजों के इलाज के लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ब्रेकी थैरेपी चालू होने से इलाज में और मदद मिलेगी। मेडिकल कॉलेज में पीजी की सीटें बढऩे की उम्मीद है, जिससे एम्स को ज्यादा विशेषज्ञ डॉक्टर मिलेंगे।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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