दिल और फेफड़े से चिपका था 3.5 किलो का ट्यूमर, डॉक्टरों ने घंटों ऑपरेशन कर बचाई मरीज की जान

दिल और फेफड़े से चिपका था 3.5 किलो का ट्यूमर, डॉक्टरों ने घंटों ऑपरेशन कर बचाई मरीज की जान

Ashish Gupta | Publish: Sep, 06 2018 05:09:15 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ की राजधानी के एसीआई (एडवांस कार्डिएक इंस्टीट्यूट) के डॉक्टरों ने एक और मरीज के ट्यूमर का इलाज कर नई जिंदगी दी है।

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी के एसीआई (एडवांस कार्डिएक इंस्टीट्यूट) के डॉक्टरों ने एक और मरीज के ट्यूमर का इलाज कर नई जिंदगी दी है। जगदलपुर से आए 30 वर्षीय अविवाहित ट्रेजरी ऑफिसर छाती के बांयी ओर दिल के ऊपर 3.5 किलो का ट्यूमर लिए जी रहा था, जिस वजह से उसे बाएं हाथ में दर्द के साथ सांस लेने में परेशानियां हो रही थी। इस पर अखबारों के माध्यम से एसीआइ की जानकारी पाकर वह सीटीवीएस के विभागाध्यक्ष डॉ. के.के. साहू के पास आया।

डॉक्टर साहू ने बताया, कि मरीज सरकारी अस्पताल में इलाज कराने से कतरा रहा था, जिस पर डॉक्टरों ने उसका सफल इलाज करने की बात कही और अस्पताल का भ्रमण कराया। जिसके बाद मरीज ने खुद ही एसीआइ को निजी अस्पताल से भी अच्छा माना और इलाज के लिए तैयार हुआ। इस पर डॉक्टरों ने 22 अगस्त को उसे भर्ती किया और 26 अगस्त को उसका सफल ऑपरेशन किया। जिसके बाद 9 दिनों के गहन निरीक्षण के बाद 4 सितंबर को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। एसीआइ की टीम में डॉ. के.के.साहू और एनेस्थीशिया डॉ. ओ.पी. सुंदरानी शामिल हैं।

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देर होती तो बचना था मुश्किल
डॉ. साहू ने बताया, कि मरीज को पिछले 6 माह से इस तरह की शिकायत थी, जो कि लगातार धीरे-धीरे बढ़ रहा था। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने पाया, कि उसका ट्यूमर छाती औ फेफड़े से चिपका हुआ था और धीरे-धीरे दिल के ऊपर दबाव बना रहा था। साथ ही तंत्रिका तंत्र भी पर भी इसकी पकड़ बनती जा रही थी। ऐसे में डॉक्टरों के अनुसार कुछ माह और यह रहता तो, निश्चित रूप से उसके दिल का फंक्शन प्रभावित होता और धीरे-धीरे वह काम करना बंद कर देता। वहीं, उसके बांए हिस्से में पैरालिसिस भी हो सकता था, जिससे उसकी स्थिति साल भर के अंदर खराब हो जाती।

एसीआई का तीसरा केस
एसीआई अस्पताल में यह अपनी तरह का तीसरा केस है। जिसका ऑपरेशन गिनती के निजी अस्पतालों में होता है, वहीं इसके लिए वहां के खर्च का अनुमान लगभग 3-4 लाख आने का लगाया जा रहा है। वहीं, एसीआई में यह ऑपरेशन नॉमिनल खर्च में ही कर लिया गया। इससे पूर्व यहां इसी तरह से एक मरीज का चार माह पूर्व 5 किलो, लगभग 20 दिनों पूर्व 2.5 किलो का ट्यूमर निकाला जा चुका है।

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