राज्यपाल बोलीं- भोलेपन की वजह से आदिवासी हुए शोषण के शिकार

आदिवासी समाज की प्रकृति सरलता, स्वाभिमान और भोलापन है। इसी प्रकृति के कारण उन्हें शोषण का शिकार बनाया जाता है। जबकि उनकी हर गतिविधि में प्रकृति की छाप दिखती है। उनके कारण ही जंगल बचा है। प्रकृति प्रेम आदिवासी समाज में कूट- कूटकर भरा है। यह बातें राज्यपाल अनुसुईया उइके ने बिलासपुर में गोंड़वाना समाज के नवाखाई कार्यक्रम एवं सामाजिक सम्मेलन के दौरान कहीं।

रायपुर/बिलासपुर. राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों से वंचित है। आदिवासियों के दर्द और तकलीफ को देखकर ही उन्होंने नौकरी छोड़ी और राजनीति में आकर उनकी सेवा के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा, आदिवासियों को संविधान में जो अधिकार मिले हैं, उसके अनुसार ही उन्हें न्याय मिले। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने कहा, राज्यपाल ने गरीब आदिवासियों की पीड़ा को महसूस किया है और उनके लिए चिंता करते हुए उन्हें न्याय दिलाने के लिए कदम उठा रही हैं। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन गोंड़वाना समाज के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुभाष परते ने दिया। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल सहित अन्य मौजूद थे।
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राज्यपाल को तीर-कमान भेंट
कार्यक्रम में पारंपरिक लोकनृत्य के द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। राज्यपाल ने नवाखाई की रस्म अदा कर समाज के लोगों को बधाई दी। समाज की ओर से उन्हें प्रतीक चिन्ह के रूप में तीर-कमान भेंट किया गया।

Nikesh Kumar Dewangan
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