IAS, जज, प्रोफेसर, डॉक्टर ने दान में दी किताबें, आज हजारों स्टूडेंट्स ले रहे इसका फायदा

IAS, जज, प्रोफेसर, डॉक्टर ने दान में दी किताबें, आज हजारों स्टूडेंट्स ले रहे इसका फायदा

Chandu Nirmalkar | Updated: 25 Nov 2018, 06:54:11 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

इसका सीधा लाभ पढऩे के इच्छुक छात्र-छात्राओं सहित अन्य लोगों को भी मिल रहा है।

विकास सोनी@रायपुर. राजधानी के पूर्व कलक्टर ओपी चौधरी की पुस्तकें दान करने की पहल ने छात्रों के लिए वर्षों पुराने ज्ञान का पिटारा खोल दिया है। रिटायर्ड जज, आइएएस, डॉक्टर, प्रोफेसर सहित छात्रों ने भी दान में रूचि दिखाते हुए, पिछले डेढ़ वर्षों में लगभग 8 हजार से अधिक पुस्तकों से लाइब्रेरी को रोशन करने में मदद की है। इसका सीधा लाभ पढऩे के इच्छुक छात्र-छात्राओं सहित अन्य लोगों को भी मिल रहा है।

इसकी मदद से किताबों के शौकीनों को वर्षों पूर्व महज 60 पैसे में खरीदी गई किताबें, जो कि आज हजार रुपए खर्च कर भी नहीं मिल पाती, मुफ्त में पढऩे को मिल रही है। इससे छात्रों को पाठ्यक्रम से इतर ठोस सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करने में भी सहूलियत मिल रही है। वहीं, दानदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। आंकड़े बताते हैं कि रोजाना 4-5 नए दानदाता नालंदा परिसर और सेंट्रल लाइब्रेरी में आ रहे हैं। दुर्लभ किताबों सहित लाइब्रेरी की व्यवस्था से छात्रों का रूझान भी पढ़ाई की ओर बढ़ा है। आलम ऐसा है कि सेंट्रल लाइब्रेरी और नालंदा परिसर में रोजाना 20-25 नए छात्र रजिस्टर हो रहे हैं और मनचाहे समय में पढ़ाई के साथ ऑक्सीजोन का आनंद ले रहे हैं।

पूरी शेल्फ ही कर दी दान
प्रदेश के पूर्व सिविल जज स्व. एस.सी. मिश्रा के निधन के बाद उनकी पत्नी ने सेंट्रल लाइब्रेरी को लगभग 700-800 किताबें दान में दी। जो कि विधि, इंजीनियरिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाज से काफी उपयोगी साबित हो रही हैं। वहीं, इन किताबों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने एक अलग सेल्फ ही उनके लिए निर्धारित कर दिया है। इसी कड़ी में सीएम हाउस से मुख्यमंत्री के निजी सचिव ने भी रूचि दिखाते हुए लगभग 50 दुर्लभ किताबें दान में दी हैं।

इंजीनियरिंग और मेडिकल की किताबें ज्यादा
दान में आ रही किताबों में इंजीनियरिंग और मेडिकल की किताबों की संख्या सर्वाधिक हैं। ये दानदाताओं द्वारा वर्षों पूर्व महज 60-70 पैसे में खरीदी गई थीं और आज उनकी कीमत हजार से 1500 रुपए के बीच हैं। वहीं, स्नातक और स्नातकोत्तर की किताबें भी बड़ी संख्या में आ रही हैं। लाइब्रेरियन माधुरी के मुताबिक ये सारी किताबें छात्रों के लिए उपयोगी हैं। ऐसी किताबें जो कि आउटडेटेड या खराब हैं, उन्हें अलग से रख दिया जाता है।

रोजाना 65 नए रजिस्ट्रेशन
छात्रों के लिए मनचाहे समय पर खुले रहने वाले नालंदा परिसर में अगस्त से लेकर अबतक 1780 छात्र पंजीकृत हो चुके हैं। वहीं, लाइब्रेरियन मंजुला जैन के अनुसार रोजाना 50 छात्र-छात्राएं नए रजिस्ट्रेशन के लिए आ रहे हैं। इसी प्रकार सेंट्रल लाइब्रेरी में भी रोजाना 15 से 20 नए छात्रों के पंजीयन हो रहे हैं। लाइब्रेरियन माधुरी खलखो के अनुसार अबतक 5550 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हो चुके हैं।

नालंदा परिसर और सेंट्रल लाइब्रेरी मिलाकर
कुल दानदाता- लगभग 300
मिली किताबों की संख्या- सेंट्रल लाइब्रेरी 7494, नालंदा 800
पुस्तकों की वेरायटी- इंजीनियरिंग, विधि, मेडिकल, अन्य विषय(स्नातक, स्नाताकोत्तर), प्रतियोगी परीक्षा
अधिकतम दान- 800 किताबें(स्व. एस.सी. मिश्रा)
न्यूनतम- 1 किताब(डीजीपी, तेलंगाना स्टेट पुलिस)

सेंट्रल लाइब्रेरी के नियम
फीस
कॉशन मनी- 1000 रुपए(रिफंडेबल)
मासिक शुल्क- 200 रुपए
सालाना- 2200 रुपए
समय
सुबह 7 से 10 बजे तक
किताबें
14 दिनों तक- 2 किताबें
रोजाना पढऩे के लिए- 2 किताबें

इन्होंने किया दान
डॉ. बी.पी. तिवारी- आइएएस- 50 किताबें
रमेश बैस- सांसद- 82 किताबें
स्व. एस.सी. मिश्रा(पत्नी)- जज- 800 किताबें
स्वराज्य दास- अपर संचालक- 50 किताबें
डॉ. कृष्ण कुमार सुगंधी- पूर्व डायरेक्टर एनआइटी, रायपुर- 50 किताबें
डॉ. शशि अतुलकर- एनआइटी, रायपुर-62 किताबें
सौम्या चौरसिया- अपर आयुक्त, नगर निगम- 19 किताबें
हेमंत वर्मा- अपर आयुक्त- 52 किताबें
डॉ. शशिकला अतुल्कर- एनआइटी, रायपुर- 21 किताब
ए.ओ. लारी- उपसंचालक रोजगार- 110 किताब
डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस- तेलंगाना- 1 किताब
डॉ. नागेश मिश्रा- आयुर्वेदिक कॉलेज, रायपुर- 6 किताबें
मनीशंकर सिंह- एनआइटी, रायपुर- 15 किताबें
देवेंद्र शर्मा- सचिव- 400 किताबें

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