
आयुष्मान से 'धनवान' बनने के लिए 5 माह में 228 स्पाइनल सर्जरी, 2 करोड़ रुपए का बिल
रायपुर. आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana) से पैसा बनाने के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कटोरातालाब स्थित प्राइवेट अस्पताल (private hospital) होपवेल में कई मरीजों को पीठ में दर्द नहीं होने के बावजूद बाहर से डॉक्टरों को बुलाकर स्पाइनल सर्जरी करवा डाली। कई मामलों में तो बिना एमआरआई करवाए ही सर्जरी की गई। 9 मार्च 2019 को शुरू हुए इस अस्पताल में पांच माह के भीतर ही 228 'स्पाइनल केनाल स्टेनोसिस' सर्जरी कर डालीं। जबकि इस दौरान शहर के 610 अस्पतालों में मिलाकर कुल ऐसे 800 मामले ही आए। अधिकांश बड़े निजी अस्पतालों में 30-40 सर्जरी हुईं। कुछ अन्य सर्जरी को जोड़कर आयुष्मान भारत योजना से 2 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम लेने का दावा कर दिया।
केस-1 : बार-बार ले जाते ऑपरेशन थिएटर
44 वर्षीय रामेश्वर बाघ आईसीयू में 19 अगस्त 2019 से भर्ती था, जबकि उसे सामान्य दर्द और कमजोरी थी। उसे सर्वाइकल स्पाइनल सर्जरी के लिए कहा गया। तैयारी कर ली गई। रोगी को एक पीआरओ अस्पताल लाया था। चलने-फिरने में कोई परेशानी नहीं है। मुझे 2-3 बार ऑपरेशन थिएटर ले जाकर वापस ले आते थे। यह बताते थे ब्लडप्रेशर हाई है, जबकि चार्ट में बढ़े हुए बीपी का कोई उल्लेख नहीं मिला। 15 दिन भर्ती रखा। इस दौरान केवल बीआइस किया गया।
केस-2 : बिना बीमारी के ऑपरेशन की तैयारी
14 साल की एक बच्ची 16 अगस्त को अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में भर्ती थी। उसे राइट लेबियल सूजन के कारण भर्ती किया गया था। अस्पताल ने बवासीर और फिशर के ऑपरेशन के लिए प्लान किया था, जबकि रोगी और उसकी मां ने इस तरह की बबासीर या फिशर संबंधी किसी तकलीफ के होने से इनकार किया।
यह होता है स्पाइनल कैनाल स्टेनोसिस
रीढ़ की हड्डियों के भीतर रिक्त स्थान (कैनाल) का संकुचन स्पाइनल कैनाल स्टेनोसिस कहलाता है, जो रीढ़ के माध्यम से गुजरने वाली तंत्रिकाओं पर दबाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार रीढ़ की हड्डी में दर्द होने, पीठ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द होने, सर्वाइकल और स्पाइन ट्यूमर को निकालने की स्थिति बनने पर दवाई और व्यायाम से आराम नहीं मिलने पर ही स्पाइनल सर्जरी की सलाह दी जाती है।
चौंकाने वाले तथ्य
- तकरीबन सभी भर्ती मरीज पीआरओ लाए थे, जिन्हें सामान्य दर्द व पीठ के दर्द की शिकायत थी। इन सभी का सामान्य रोगियों की तरह ओपीडी में ही इलाज किया जा सकता था। जबकि उन्हें आईसीयू में भर्ती दिखाया गया था।
- मोतियाबिंद के केसों में दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। दो बिस्तरों के बीच की दूरी गाइडलाइन के अनुसार नहीं थी। सर्जरी के बाद एक बिस्तर पर 2-2 मरीज थे। वार्ड गंदा था। मोतियाबिंद के 25 रोगी एक ही क्षेत्र से पीआरओ द्वारा लाए गए थे।
तमाम गड़बडिय़ां मिली हैं
आयुष्मान भारत योजना के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. श्रीकांत राजिमवाले ने बताया कि अस्पताल के खिलाफ जांच की जा रही है। कई अनियमितताएं मिली हैं। अस्पताल प्रबंधन से कई कागजात मंगाए गए हैं।
हॉस्पिटल के डायरेक्टर ने कहा
होपवेल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. राजेश नंदा ने कहा कि किसी की जबरदस्ती सर्जरी नहीं की जा सकती है। हमारे अस्पताल में मरीजों का मुफ्त में इलाज होता है, इसलिए इतनी संख्या में सर्जरी हुई है। जांच टीम ने एमआरआई व अन्य की जांच रिपोर्ट मांगी थी, जिसे दे दिया गया है।
दोषी पाए जाने पर करेंगे कार्रवाई
छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) की स्वास्थ्य सचिव (health secretary) निहारिका सिंह बारिक ने कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में है, जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट अभी मेरे पास नहीं पहुंची है। दोषी पाए जाने पर अस्पताल प्रबंधन पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
स्पाइनल सर्जरी की प्रक्रिया जटिल
रायपुर के डीकेएस हॉस्पिटल (raipur DKS hospital) के न्यूरो सर्जन डॉ. संजीव गुप्ता के मुताबिक स्पाइनल सर्जरी की प्रक्रिया उच्च स्तर की एवं जटिल होती है। डॉक्टर दवाओं से ही ठीक करने की कोशिश करते हैं, जब जरूरी होता है तभी सर्जरी की जाती है। केस के हिसाब से स्पाइनल सर्जरी में टाइम लगता है।
Published on:
01 Oct 2019 08:00 am
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