कॉस्मेटिक सामानों की प्रदेश में जांच की व्यवस्था नहीं, सिर्फ लाइसेंस कर रहे हैं जारी

- क्रीम, पाउडर, फेशियल पैक, लिपस्टिक का सावधानी से करें उपयोग, हो सकते हैं नकली .

By: Bhupesh Tripathi

Published: 30 Oct 2020, 11:48 PM IST

रायपुर। प्रदेश में क्रीम, पाउडर, स्क्रबर, क्लींजर, फेशियल पैक, आई ब्रो, लिपस्टिक और नेल पॉलिश जैसे सबसे ज्यादा बिकने वाले उत्पादों की यहां जांच ही नहीं हो पाती है। जांच नहीं तो सैंपलिग भी नहीं होती। राज्य के लैब में जांच की सुविधा मौजूद नहीं होने के कारण ही सौन्दर्य प्रसाधन उत्पादों के नमूने तक नहीं लिए जाते हैं। राज्य स्तरीय लैब के लिए केवल नहाने के साबुन और टूथपेस्ट का नमूना ही लिया जाता है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की राज्य स्तरीय प्रयोगशाला इस स्तर की नहीं है कि सभी अमानक सौंदर्य प्रसाधन सामग्री की जांच कर सके। इस वजह से विभाग सौन्दर्य प्रसाधन के तमाम उत्पादों में से केवल साबुन और टूथपेस्ट की ही जांच करता है।

एक ही जांच अधिकारी
सरकारी प्रयोगशाला में सिर्फ एक ही ड्रग एनालिस्ट है। वही दवाओं के सैंपल की जांच करते हैं। इस वजह से कॉस्मेटिक की जांच नहीं हो पाती। इसी वजह से में नकली उत्पाद धड़ल्ले से बिक रहे हैं। न केवल राजधानी बल्कि पूरे राज्य में बिकने वाली प्रसाधन सामग्री की जांच के लिए रायपुर में औषधि प्रशासन विभाग की प्रयोगशाला राज्य स्थापना के दो साल बाद बनाई गई है। लेकिन जांच करने वाली मशीनें अब तक चालू नहीं हो सकी हैं।

केवल एक दर्जन उत्पाद की जांच
प्रयोगशाला में एक साल के अंदर सौन्दर्य सामग्री के केवल एक दर्जन उत्पादों की जांच की गई है। जिनमें साबुन और टूथपेस्ट जैसे प्रोडक्ट शामिल है। जिनकी जांच रिपोर्ट में कुछ भी नहीं मिला है। बैसे भी जांच उन उत्पादों की हुई ही नहीं है जिनमें नकली और मिलावट का खेल है। विभाग की जांच केवल औपचारिकता बन कर रह गई है।

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Bhupesh Tripathi
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