किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य में धान खरीदी की तैयारी में जुटी सरकार, तारीख अभी तय नहीं

Paddy Procurement in Chhattisgarh: किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य में धान खरीदने के लिए राज्य सरकार तैयारियों में जुटी है, लेकिन इसकी तिथि की घोषणा नहीं हुई है।

By: Ashish Gupta

Published: 11 Oct 2021, 03:00 PM IST

रायपुर. Paddy Procurement in Chhattisgarh: किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य में धान खरीदने के लिए राज्य सरकार तैयारियों में जुटी है, लेकिन इसकी तिथि की घोषणा नहीं हुई है। माना जा रहा है कि इस बार भी सरकार 1 दिसम्बर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत करेगी। जबकि किसान संगठनों की मांग है कि सरकार किसानों को राहत देते हुए 1 नवम्बर से धान की खरीदी शुरू करें। मंत्रिमंडलीय समिति के प्रवक्ता व मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि धान खरीदी की तैयारी शुरू हो गई है। बारदानों की व्यवस्था के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। वहीं खरीदी के लिए फंड जुटाने की भी व्यवस्था की जा रही है।

जल्द होगी उप समिति की बैठक
धान खरीदी की नीति का निर्धारण करने के लिए जल्द ही मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक होगी। इसमें धान खरीदी की मात्रा, धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य, बारदाने की व्यवस्था, धान के उठाव जैसे अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसके बाद उप समिति की अनुशंसाओं को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में रखा जाएगा।

पंजाब व हरियाणा में खरीदी
पंजाब व हरियाणा में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 3 अक्टूबर से शुरू हो गई है। जानकारों का कहना है कि पंजाब और हरियाणा में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा है। वहां धान की बोआई पहले हो जाती है। इस वजह से हर साल इन दोनों राज्यों में 1 अक्टूबर से धान की खरीदी शुरू हो जाती है।

61.5 पांच लाख टन चावल लेने की मंजूरी
खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस साल 61.5 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की सहमति दी है। इसमें केवल अरवा चावल लिया जा रहा है। उसना चावल के लिए केंद्र ने अनुमति नहीं दी है। जबकि प्रदेश में उसना चावल बनाने की क्षमता अधिक है। विभागीय स्तर पर प्रयास हो रहा है कि केंद्र सरकार से उसना चावल की भी अनुमति मिल सकें।

बता दें कि पिछली बार राजीव गांधी किसान न्याय योजना के चलते केंद्र सरकार यह मान रही थी कि प्रदेश सरकार किसानों को बोनस दे रही थी। इस वजह से चावल लेने में कटौती कर दी गई थी। बचत धान के निपटारा के लिए राज्य सरकार को उसकी नीलामी करनी पड़ी थी। चूंकि अब न्याय योजना का लाभ सभी फसलों, सब्यिों व उद्यानिकी में मिल रहा है, इसलिए अब विवाद की स्थिति नहीं है।

यह है देरी से खरीदी का गणित
किसान नेता राजकुमार गुप्त का कहना है कि कुछ किस्मों के धान की कटाई दशहरा के बाद से शुरू हो जाएगी। देरी से धान खरीदी होने से किसानों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। कटाई के बाद धान को संभालकर रखना बड़ा मुश्किल होता है। बारिश होती है, तो धान के गिले होने का खतरा और धूप होती है तो सूखत का खतरा आता है। उनका कहना है कि 1 नवम्बर से धान खरीदी होने पर उसमें नमी रहती है। इससे वजन अधिक होता है। एक महीने में धान में 10 से 12 फीसदी का सूखत आ जाता है। इससे सरकार कम पैसे में ज्यादा धान की खरीदी कर लेती है, लेकिन इससे किसानों को नुकसान होता है।

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