कोरोना को मात देने के बाद खांसी नहीं छोड़ रही पीछा, लोग हो रहे लंग्स फाइब्रोसिस के शिकार

डॉक्टर जब मरीज का सीटी स्कैन करवा रहे हैं तो वे फेफड़ों में घाव जैसे धब्बे पा रहे हैं। जिसे मेडिकल साइंस में लंग्स फाइब्रोसिस कहा जाता है। यह बीमारी इलाज के अभाव में गंभीर रूप ले सकती है। रायपुर में ऐसे मरीज बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं।

By: Karunakant Chaubey

Published: 10 Oct 2020, 08:40 AM IST

रायपुर. प्रदेश में कोरोना वायरस को 1.06 लाख मात दे चुके हैं। मगर, घर वापसी कर चुके कुछ प्रतिशत मरीजों को सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी रिपोर्ट की जा रही है। डॉक्टर जब मरीज का सीटी स्कैन करवा रहे हैं तो वे फेफड़ों में घाव जैसे धब्बे पा रहे हैं। जिसे मेडिकल साइंस में लंग्स फाइब्रोसिस कहा जाता है। यह बीमारी इलाज के अभाव में गंभीर रूप ले सकती है। रायपुर में ऐसे मरीज बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। निजी अस्पताल और सरकारी अस्पतालों में ये डॉयग्नोस किए जा रहे हैं।

'पत्रिका' ने इसे लेकर टीबी एंड चेस्ट स्पेशलिस्ट से बात की। वे मानते हैं कि यह पोस्ट कोविड मरीजों का बढऩा अच्छे संकेत नहीं है। यह समस्या खासकर उन लोगों में देखने में मिल रही है जो कोरोना होने पर सांस संबंधी परेशानी से ग्रसित थे। या जिन्हें ऑक्सीजन की जरुरत पड़ी थी। स्पष्ट है कि ऐसे मरीजों को सावधानी बरतने की जरुरत है।

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ठीक हो चुके व्यक्तियों में ये लक्षण भी

खांसी के अलावा हल्का बुखार, बदन दर्द, शरीर में चकते, सांस लेने में तकलीफ, जोड़ों में दर्द, थकान, गले में खराश और सिर दर्द भी शामिल है।

डॉक्टरों के सुझाव- ठीक हो चुके मरीजों को गर्म पानी ही पानी चाहिए, नियमित गरारे करने चाहिए, दवाएं समय पर लेनी चाहिए, कोई भी ठंडी चीज नहीं लेनी चाहिए, पानी की भाप लें। हल्दी वाला गर्म दूध पीएं। ये कुछ घरेलू उपाएं हैं जिन पर ध्यान दें। अगर फिर भी खांसी नहीं जाती है तो डॉक्टर को दिखाएं।

एक्सपर्ट बोले

मेरे पास 10 में 9 व्यक्तियों की यह शिकायत रहती है कि खांसी नहीं जा रही है। उनका सीटी स्कैन करवाया जाता है। जिसमें हम फेफड़ों में धब्बे पाते हैं यानी संक्रमण। इसका समय पर इलाज जरूरी है। कई बार देर करने से फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचता है। तकलीफें बढ़ती चली जाती हैं।

-डॉ. आरके पंडा, विभागाध्यक्ष, टीबी एंड चेस्ट, डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल

लंबे समय तक उन लोगों को खांसी की समस्या ज्यादा हो रही है, जिन्हें ऑक्सीजन के सपोर्ट पर रखा गया था। या जिन्हें आईसीयू ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। अगर, खांसी है तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। क्योंकि कई बार स्थिति गंभीर भी हो जाती है। एक और बाद लोग इलाज के लिए गूगल न करें। वे ७-८ दिन गूगल से इलाज कर निकालते हैं। और गंभीर होकर आते हैं।

-डॉ. पंकज ओमर, प्रभारी कोविड१९, श्रीनारायणा हॉस्पिटल

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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