महासंग्राम: पश्चिम में पुराने चेहरे पर ही दांव खेलने की हो रही तैयारी

महासंग्राम: पश्चिम में पुराने चेहरे पर ही दांव खेलने की हो रही तैयारी

Deepak Sahu | Publish: Sep, 05 2018 11:57:28 AM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

परिसीमन के बाद 2008 में रायपुर शहर पश्चिम विस के लिए पहली बार चुनाव हुआ। भाजपा के राजेश मूणत ने कांग्रेस के संतोष अग्रवाल को 14 हजार 845 मतों से हराया था।

रायपुर. परिसीमन के बाद 2008 में रायपुर शहर पश्चिम विस के लिए पहली बार चुनाव हुआ। भाजपा के राजेश मूणत ने कांग्रेस के संतोष अग्रवाल को 14 हजार 845 मतों से हराया था। 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवार बदला। विकास उपाध्याय ने मूणत को टक्कर दी, लेकिन हरा नहीं सके। मतों का अंतर घटकर 6 हजार 160 रह गया। इस बार मूणत ने क्षेत्र पर ध्यान भी दिया है।

भाजपा में उनकी दावेदारी को फिलहाल कोई चुनौती नहीं दिख रही। लेकिन कांग्रेस में 34 नाम कतार में हैं। इसमें विकास उपाध्याय, युवा कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल, आदि प्रमुख दावेदारों में शुमार हैं। बहुजन समाज पार्टी से भोजराज गौरखेड़े ने दावा किया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने उत्तम जायसवाल को अपना चेहरा घोषित कर रखा है। इस सीट पर जनता कांग्रेस की उम्मीदवारी सामने नहीं आई हैं। इस क्षेत्र में ट्रांसपोर्टर, कारोबारी, सरकारी-गैर सरकारी कर्मचारी और प्रवासियों की बहुतायत है। उसके अलावा क्षेत्रों में निम्न आय वर्ग के मतदाताओं की भी अच्छी-खासी संख्या है। मौजूदा विधायक मूणत ने क्षेत्र में काफी काम भी कराया है। भाजपा उस काम के भरोसे सीट निकालने का दावा कर रही है। कांग्रेस को पांच साल के अपने संघर्षों पर भरोसा है। यह भरोसा मतदाताओं की कसौटी पर कितना उतरता है यह तो वक्त बताएगा, फिलहाल क्षेत्र में नए चेहरों की उम्मीद कम ही दिख रही है।

उम्मीद की वजह
नजदीकी जीत के बाद राजेश मूणत ने पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में खासा ध्यान दिया। हारने के बाद से ही विकास उपाध्याय ने संघर्ष तेज किया। हर घर तक पहुंच बनाई। बसपा के भोजराज बौद्घ महासभा के पदाधिकारी हैं, कांग्रेस से भी जुड़े थे। उनको समाज के मतदाताओं पर भरोसा है।

पिछले चुनाव का हाल
2013 चुनाव में राजेश मूणत को मजबूत टक्कर मिली। परिणाम आया तो मूणत को 64,611 वोट मिले थे, मुकाबले में कांग्रेस के विकास उपाध्याय को 58,451 मत मिले।

एकता नगर के व्यापारी मयंक सिंह ने बताया जीएसटी और नोटबंदी के बाद व्यापारी वर्ग में नाराजगी बढ़ गई है। कानून व्यवस्था भी पटरी पर रही है। सत्ता के इशारों पर काम हो रहा है। आने वाले चुनाव में सोच-समझ कर ही
वोट देंगे।

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