निजी मेडिकल कॉलेज कर रहे हैं छात्रों से हर साल 7 करोड़ी की अवैध वसूली

- एएफआरसी ने तय की फीस उसके बाद भी हर साल 55 हजार अधिक की वसूली .

 

By: Bhupesh Tripathi

Published: 10 Nov 2020, 10:54 PM IST

रायपुर। प्रदेश के निजी मेडिलक कॉलेज छात्रों से ठगी का खेल खेल रहे हैं। प्रवेश और शुल्क नियामक समिति द्वारा जो फीस मेडिकल कॉलेज के निर्धारित की गई है। उससे अतिरिक्त बस सुविधा व अन्य सुविधा का फीस जोड़कर लिया जा रहा है। इसके लिए नोटिस भी कॉलेज में चस्पा कर दी गई है। मामले की शिकायत डीएमई और एएफआरसी के सचिव को भी की गई है। बतादें कि एएफआरसी ने एमबीबीएस की सभी सत्र की फीस शिक्षण शुल्क व अन्य शुल्क समेत तय कर दी है।

प्रदेश में तीन निजी मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में दो-दो बैच के 300 छात्रों से हर साल 55 हजार की वसूली की जाती है। इस तरह हर साल छात्रों से 1 करोड़ 65 लाख की वसूली की जाती है। अब नए प्रवेश के बाद 150 प्रथम वर्ष के छात्रों के आने से यह राशि 82 लाख 50 हजार अतिरिक्त जुड़ जाती है। इस तरह सभी मेडिकल कॉलेजों में हर साल छात्रों से २ करोड़ 47 लाख 50 हजार रुपए की वसूली की होगी। यह पूरे शिक्षण सत्र में 10 करोड़ के आसपास मानी जा सकती है। इस तरह तीनों मेडिकल कॉलेजों में एक साल में साढे सात करोड़ साल और पूरे शिक्षण सत्र में 30 करोड़ की अवैध वसूली की जाती है।

यह है आदेश

एफआरसी द्वारा के संशोधन एक्ट २८ सितंबर २०१६ के मुताबिक के बिंदू क्रमांक २८(३) के मुताबिक कुल फीस ५ लाख १० हजार ५०० रुपए तय की गई है। जिसमें मेडिकल कॉलेजों का वार्षिक शुल्क ४ लाख ४३ हजार ३००, ट्यूशन फीस समेत, विकास शुल्क ५३ हजार १९६ व टूर एंड ट्रेवल्स शुल्क १४ हजार रुपए तय की गई है। जो कुल ५ लाख १० हजार ५०० रुपए होता है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा निर्धारित फीस की से ५५ हजार रुपए अतिरक्ति फीस की मांग की जा रही है। अलग-अलग बैच की फीस में कुछ अंतर है लेकिन भ्रमण शुल्क निर्धारित शुल्क में ही जुड़ा हुआ है।

कोरोना कॉल में अर्थिक संकट
बतादें कि मेडिकल कॉलेजों की शीटों के लिए छात्रों के अभिभावकों को लाखों रुपए का शिक्षा ऋण लेना पड़ता है। कई लोग अपनी संपत्ती तक बेंच कर बच्चों को डॉकटर बनाने का सपना पूरा करते हैं। वर्तमान में कोरोना कॉल में पूरा देश अर्थिक संकट से गुजर रहा है एेसे में छात्रों से नियम विरुद्ध फीस की वसूली की जा रही है।

भ्रमण शुल्क के नाम पर वसूली

बतादें कि पैत्रिक राज्य मध्यप्रदेश सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों के भ्रमण शुल्क की राशि ६ हजार रुपए प्रति वर्ष तय की है। जबकि एमबीबीएस की शिक्षा काल ४ वर्ष ६ माह में ४० शिक्षा भ्रमण कराया जाना आवश्यक है। इस तरह एक वर्ष में ८ भ्रमण कराए जाते है। जिसकी दूरी २५ से ३० किलोमीटर होनी चाहिए। इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा ४० हजार रुपए प्रति वर्ष की वसूली कर रहा है। इस तरह मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेज में २६ हजार रुपए एमबीबीएस के शिक्षण काल में लिया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में १ लाख ४० हजार रुपए की मांग की जा रही है।

एएफआरसी ने बताया वैकल्पिक शुल्क
बतादें कि अपने आदेश में एएफआरसी नें ट्रांस्पोटेशन व हॉस्टल शुल्क को वैक ल्पिक बताया है। यदि छात्र चाहे तो दोनो सुविधा नही भी ले तो उसका शुल्क प्रबंधन द्वारा नहीं वसूला जा सकता। लेकिन रिम्स प्रबंधन द्वारा दोनों शुल्क को अनिवार्य किया गया है।

दो-दो बैच वर्तमान में एक और बैच का प्रवेश प्रारंभ

इस संबंध में डीएमई से चर्चा की जाएगी। छात्रों के हित का पूरा ध्यान रखा जाएगा। तय फीस लेने के सबंध में निर्देश जारी किया जाएगा।

टीएस सिंह देव, मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग

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