शिकायत करने वाले पीड़ित को ही रायपुर पुलिस ने बनाया आरोपी

शिकायत करने वाले पीड़ित को ही रायपुर पुलिस ने बनाया आरोपी

Deepak Sahu | Publish: Apr, 23 2019 08:46:30 PM (IST) | Updated: Apr, 23 2019 08:48:23 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

रायपुर पुलिस अधिकारियों के पास अनोखा मामला सामने आया है। जिसमें बीसी के नाम पर ठगी करने वालों के खिलाफ जिस इंजीनियर ने शिकायत की, पुलिस ने जांच के दौरान इंजीनियर को ही ठगो को साथी बताकर जेल भेज दिया।

रायपुर. पेंडिंग केसों की जल्द से जल्द विवेचना कर पीडि़तों को न्याय दिलवाने का निर्देश मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और डीजीपी डीएम अवस्थी ने छत्तीसगढ़ पुलिस को दिया है। लेकिन राजधानी रायपुर में ही पुलिस महकमे के अधिकारी मुख्यमंत्री और डीजीपी के निर्देश का पालन नहीं कर रहे है। रायपुर पुलिस अधिकारियों के पास अनोखा मामला सामने आया है। जिसमें बीसी के नाम पर ठगी करने वालों के खिलाफ जिस इंजीनियर ने शिकायत की, पुलिस ने जांच के दौरान इंजीनियर को ही ठगो को साथी बताकर जेल भेज दिया।

इंजीनियर ने कोर्ट में केस लड़ा और बरी होकर दोबारा मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस महकमे के सभी अधिकारियों के पास आरोपी की शिकायत कर पैसा वापस करवाने की गुहार लगाई। पीडि़त को अधिकारियों के पास गुहार लगाते हुए 5 साल से ज्यादा का समय हो गया, लेकिन अब तक उसको इंसाफ नहीं मिला है। न्याय के आस में इंजीनियर थाना और अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, और अफसर केस में जांच करने की बात कह रहे हैं।

यह है मामला

पुरानी बस्ती इलाके में रहने वाले इंजीनियर अखिलेश तिवारी ने वर्ष 2015 में बीसी खिलाने के नाम पर उनसे ठगी करने वाले गावड़े परिवार के बारे में पुरानी बस्ती थाना में शिकायत की थी। पीडि़त ने शिकायत के दौरान पुलिसकर्मियों को बताया कि भाठगांव में रहने वाली प्रीति राव और प्रार्थी अखिलेश तिवारी की पत्नी एक ही स्कूल में शिक्षिका है। प्रीति राव के परिवार से उसकी जान पहचान 2012 में हुई थी।

प्रीति राव और उनके पति हलधर राव ने उन्हें बीसी खेलने का लालच दिया और लगाई गई रकम के बदले 12वें महीने में सवा गुना रकम वापस करने की बात कही। संबंध होने की वजह से अखिलेश राव परिवार के झांसे में आ गया और वर्ष 2012 से 2013 तक किस्तों में 53 लाख 75 हजार रुपए ऑनलाइन और एफिड डेफिड करके दे दिए।

समय पूरा होने के बाद राव परिवार ने बीसी खिलाना बंद कर दिया और अखिलेश तिवारी के साथ दर्जनों लोगों का पैसा गबन कर दिया। पीडि़त ने पैसे की मांग की और पैसा नहीं देने पर पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी तो आरोपियों ने मई 2016 में एजेंटो और कुछ पीडि़तों को अपने साथ मिलाकर केस कर उसे भी जेल भिजवा दिया। पीडि़त कोर्ट से केस लडकऱ बरी हुआ और तब से अब तक विभाग में इंसाफ पाने के लिए चक्कर लगा रहा है।

पुलिस पर लगाया मिलीभगत का आरोप

पीडि़त अखिलेश तिवारी ने पत्रिका को बताया कि एजेंटों की शिकायत पर उसके खिलाफ पुरानी बस्ती थाना में पदस्थ एएसआई अनिल साहू ने जांच की थी। जांच के दौरान एएसआई साहू ने जिन पीडि़तों के बयान को आधार बताकर उन्हें जेल भेजा वो सभी पीडि़त वर्ष 2015 में उनके अखिलेश तिवारी के पक्ष में बयान दिया था। केस की जांच के दौरान पीडि़त अखिलेश तिवारी ने विवेचना अधिकारी एएसआई साहू को सभी दस्तावेज दिखाए, लेकिन विवेचना अधिकारी ने उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों की फाइल को जांच में शामिल नहीं किया, जिस वजह से वो 14 महीने तक जेल में बंद रहे।


इनसे मांगा न्याय

पीडि़त अखिलेश साहू ने केस में इंसाफ पाने और ठगों से पैसा वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, डीजीपी डीएम अवस्थी, आईजी, एसपी, सीएसपी के पास शिकायत कर चुके है। हाल ही में पीडि़त ने एसएसपी आरिफ शेख से दोबारा शिकायत की है। एसएसपी आरिफ शेख के निर्देश के बाद भी केस में ठोस जांच नहीं की जा रही है।

मैं अभी हाईकोर्ट में हूं। केस की डिटेल जानकारी मुझे नहीं है। मैं कल कार्यालय बैठूंगा तो प्रार्थी को आप मेरे पास भेज देना। प्रार्थी को न्याय मिलेगा।
-कृष्णा पटेल, सीएसपी पुरानी बस्ती

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