छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस के मरीजों के साथ बढ़ रहा दवाओं का टोटा, डॉक्टर-मरीज दोनों परेशान

छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस (Mucormycosis) के मरीजों की जैसे-जैसे संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे इसके इंजेक्शन व दवाओं की किल्लत भी बढ़ती जा रही है।

By: Ashish Gupta

Published: 10 Jun 2021, 11:05 PM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस (Mucormycosis) के मरीजों की जैसे-जैसे संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे इसके इंजेक्शन व दवाओं की किल्लत भी बढ़ती जा रही है। हालात यह है कि शासकीय व निजी हॉस्पिटल एक-एक मरीज की जरूरत के हिसाब से इंजेक्शन के लिए तरस रहे हैं। इंजेक्शन के अभाव में इनके सबस्टीट्यूट से मदद ली जा रही है। इंजेक्शन व दवाओं के अभाव से अस्पतालों में भर्ती मरीज के परिजनों के साथ-साथ इलाज करने वाले डॉक्टर भी परेशान हैं।

प्रदेश में विगत 4 दिनों में 47 नए मरीज मिले हैं, वही 6 की मौत हुई है। प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या अब बढ़कर 276 हो गई है, जिसमें से 16 डिस्चार्ज हुए हैं। वहीं, मरने वालों की संख्या 17 हो गई है। इसके अलावा 11 ऐसे मरीजों की मौत हुई है, जिन्हें ब्लैक फंगस तो था लेकिन मौत हार्ट अटैक, निमोनिया आदि दूसरे कारणों से हुई है। 276 मरीजों में से 141 की सर्जरी हो चुकी है।

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वहीं राजधानी के एम्स में ब्लैक फंगस के सबसे ज्यादा 166 मरीज भर्ती हैं। वहीं, आंबेडकर अस्पताल में 30, भिलाई के सेक्टर-9 हॉस्पिटल में 31 तथा बाकी निजी व प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भर्ती हैं। प्रदेश के दुर्ग, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, बेमेतरा, बलौदबाजार, महासमुंद व राजनांदगांव, कोरबा, सूरजपुर, कोरिया व बलरामुपर, धमतरी, सरगुजा, बालोद व मुंगेली, कोंडगांव, गरियाबंद और कांकेर से ब्लैक फंगस के मरीज मिल चुके हैं।

खाद्य एंव औषधि प्रशासन विभाग रखता है निगरानी
शासकीय व निजी अस्पतालों को ब्लैक फंगस की दवाएं व इंजेक्शन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी खाद्य एंव औषधि प्रशासन विभाग को मिली है। जिला दवा विक्रेता संघ के सचिव अश्विनी विग का कहना है कि बाजार में उलपब्ध दवाओं व इंजेक्शन की पूरी जानकारी विभाग को दी जाती है। अस्पतालों की डिमांड के अनुसार विभाग उपलब्ध कराता है। दवाएं व इंजेक्शन बाहर की कंपनी से मंगाया जाता है। कंपनी को जितनी डिमांड भेजी जाती है, उसकी एक तिहाई ही आती है।

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महामारी नियंत्रक कार्यक्रम व प्रवक्ता स्वास्थ्य विभाग के संचालक डॉ. सुभाष मिश्रा ने कहा, केंद्र सरकार से ही पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन और दवाएं नही मिल पा रही है, जिसकी वजह से किल्लत हो रही है। रेमडेसिविर की कमी जिस प्रकार दूर हुई थी, उसी तरह ब्लैक फंगस की दवाओं व इंजेक्शन की किल्लत भी जल्द दूर होगी।

रायपुर एम्स के निदेशक डॉ. नितिन एम नागरकर ने कहा, 700 एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की जरूरत पड़ रही है, जो पर्याप्त मात्रा में नही मिल पा रही है। इंजेक्शन न मिलने की स्थिति में इनके सबस्टीट्यूट से मदद ली जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से 600 वॉयल एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन मिले हैं, जिससे कुछ राहत मिलेगी।

आंकड़ों में प्रदेश में अब तक
276 में मरीजों की पुष्टि
16 ठीक होकर लौट चुके है घर
17 की हो चुकी है मौत
11 की ब्लैक फंगस के साथ अन्य बीमारियों से मृत्यु
10 मई से मिलना शुरू हुए थे मरीज

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