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Shri Ram Katha: ‘सुख-दुख हरि पर छोड़ दें, मिलेगी उनकी कृपा’ – विजय कौशल महाराज

Vijay Kaushal Maharaj : भक्ति की समाधि का सिद्धांत में तन की महत्ता गौण होती है। मन से ईश्वर की साधना में व्यक्ति जितना समर्पित होगा ईश्वर की कृपा कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगी। शरीर हमारा कहीं भी हो, लेकिन चित्त में भगवान होना चाहिए। भगवान की भक्ति में मन को लगाने के लिए ध्यान प्रमुख साधन है।  

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Vijay Kaushal Maharaj: बिलासपुर. जो मनुष्य अपना सुख, दुख और सारे काम हरि पर छोड़ देता है उस पर भगवान की हमेशा कृपा होती है। इंसान लालची होता है। सुख को अपना कर्म और दुख को हरि इच्छा कहता है। यह सोच बहुत गलत है। यदि आपने अपना हर काम ईश्वर पर छोड़ दिया है। आपके सभी मनोरथ सिद्ध होंगे। लेकिन इसके लिए विश्वास रखना होगा। यह बातें स्थानीय लाल बहादुर शास्त्री शाला मैदान में प्रभु श्री राम की कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ से मानस मर्मज्ञ श्री विजय कौशल जी महाराज ने कही। विजय कौशल महाराज ने कहा भगवान का अवतार हमेशा उद्देश्य को लेकर होता है।

विजय कौशल महराज ने रामकथा के दूसरे दिन भगवान शिव पार्वती के संवाद के साथ प्रस्तुत किया। मानस मर्मज्ञ विजय कौशल ने बताया कि भगवान ना तो निर्गुण है ना ही सगुण है। भगवान शिव ने माता पार्वती से बताया कि जब भी पृथ्वी अधर्म का बोलबाला होता है साधु-संतों, सज्जनों के लिए भगवान असहाय की पीड़ा हरने दुष्टों का नाश करने अवतार लेते हैं। उन्होने कहा जब बुद्धि से सामन्जय बैठ जाए वही समाधि है।

भक्ति की समाधि का सिद्धांत में तन की महत्ता गौण होती है। मन से ईश्वर की साधना में व्यक्ति जितना समर्पित होगा ईश्वर की कृपा कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगी। शरीर हमारा कहीं भी हो, लेकिन चित्त में भगवान होना चाहिए। भगवान की भक्ति में मन को लगाने के लिए ध्यान प्रमुख साधन है।

तीर्थ स्थल अध्यात्म की कार्यशाला...
विजय कौशल कौशल ने बताया बेटा बेटी ब्याहने के बाद परिवार के मुखिया और पारिवारिक सदस्यों को जंगल में तीर्थों में रहने की आवश्यकता नहीं है। घर को ही तीर्थ बनाए, सहयोगी बनें संयमी रहें, ईश्वर की भक्ति में लीन रहें,कथा का श्रवण करें।आज के युग में माता-पिता से संवाद नहीं करने वालों पर भगवत कृपा नहीं होती। लोग डॉक्टर वकील इंजीनियर नेता के लिए घंटों बैठे रहते हैं। लेकिन मां-बाप से बात करने का समय नहीं है। कल्याण के लिए संवेदनशीलता का होना एवं भक्ति भावना से साधना में लीन होना बहुत जरूरी है। अहंकार दुख का कारण है।

दो कुल तारती है बेटी
आचार्य विजय कौशल जी ने कहा बेटा और बेटी दोनों समान होते हैं। बेटी के जन्म पर भी खुशी का वातावरण होना चाहिए । जिस घर में बेटी का जन्म नहीं होता वह घर अभागा होता है। इसीलिए बेटी के नाम के आगे सौभाग्यवती जुड़ा रहता है। विजय कौशल जी ने कहा, बेटी अपने परिवार के साथ दूसरे परिवार में सौभाग्य शाली बनाती है।

इनकी रही उपस्थिति
व्यासपीठ से विजय कौशल महाराज ने कहा कि पूर्व मंत्री श्री अमर अग्रवाल के निवास पर प्रतिदिन प्रात: 7:30 से 8:00 तक हवन का आयोजन किया जाता है। सभी हवन में पहुंचकर शामिल हो सकते हैं। कथा के अंत में समिति के संरक्षक एवं पदाधिकारियों ने सपरिवार आरती कर प्रसाद वितरण किया। आयोजन में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, श्रीनिवास केडिया संजय शुक्ला, कैलाश अग्रवाल, गोपाल शर्मा, प्रदीप शर्मा, गुलशन ऋषि, कुसुम, बृजमोहन अग्रवाल, आशुतोष साव, बेनी गुप्ता, सुनील संथालिया शामिल हुए।