बेगम की याद में शाहजहां ने बनवाया था ताजमहल, इस टीचर ने भी किया ये बड़ा काम,जमकर हो रही तारीफ

बेगम की याद में शाहजहां ने बनवाया था ताजमहल, इस टीचर ने भी किया ये बड़ा काम,जमकर हो रही तारीफ

Chandu Nirmalkar | Publish: Sep, 06 2018 06:31:37 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

इस टीचर ने पत्नी की याद में बनाया है शिक्षागुडी, जहां 30 साल से बच्चों के लिए कर रहे ये नेक काम

जगदलपुर. शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में ताजमहल बना दिया था। कुछ इसी तरह छत्तीसगढ़ के कुम्हारपारा में रहने वाले जगदलपुर के संतोष कुमार नाग ने अपनी पत्नी कुंती की याद में 'शिक्षागुड़ी' बनाया। इतना ही नहीं युवाओं को शिक्षित करने अधूरा सपने को पूरा करने का भी जिम्मा उठाया। इंजीनियरिंग कॉलेज में बतौर टेक्निशियन के रूप में कार्य कर रहे संतोष आज वे अपने घर में पहली से बारहवीं तक के बच्चों को पिछले 30 साल से नि:शुल्क पढ़ाते हुए अबतक 10 हजार से अधिक लोगों को पढ़ाया चुके है।

..और पत्नी चली गई छोड़कर
शहर के कुम्हारपारा में रहने वाले संतोष कुमार की जिंदगी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। संतोष बताते हैं कि 80 के दशक में प्रशासन की शिक्षा के प्रचार प्रसार कार्यक्रम साक्षर बस्तर, सुरंद बस्तर के तहत दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ा और उसके बाद 1993 में शादी कर ली। शादी के बाद भी दोनों साथ मिलकर इस कार्यक्रम में जुटे हुए थे। लेकिन इसी बीच प्रेगेनेंसी के दौरान पत्नी की मौत हो गई।

 

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पत्नी की याद में बनाया शिक्षागुड़ी
संतोष को बड़ा झटका लगा, लेकिन शिक्षा के प्रति ऐसा जूनून की उन्होंने घर के सामने पत्नी की याद में शिक्षा गुड़ी बना दी। गुड़ी में सरस्वती माता की फोटो के साथ साक्षर बस्तर सुरंद बस्तर कार्यक्रम का लोगो, बारहखड़ी और ए से लेकर जेड तक हर दिन गुड़ी में लिखते हैं। इसके यहां आस पास खेलने वाले बच्चों में पढ़ाई के प्रति जानकारी मिलती है। उन्होंने बताया कि पहले वे इस गुड़ी में ही पढ़ाते थे। उपर में अलग से पक्के मकान में पढ़ा रहे हैं। घटना के बाद से वे लगातार अपने घर में नि:शुल्क लोगों को पढ़ा रहे हैं। पिछले 30 सालों से लगे इस काम में संतोष ने अब तक 10 हजार से अधिक लोगों को शिक्षित कर चुके हैं।

 

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जुनून ऐसा कि जिस स्कूल में शिक्षकों की कमी सुनी वहां पढ़ाने चल दिए
ऐसा नहीं है कि संतोष केवल अपने घर में ही बच्चों को पढ़ाते हैं। उन्हें जिस स्कूल में शिक्षकों की कमी की जानकारी मिली, वे वहां ही पढ़ाने चल दिए। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन अपने खर्चे पर साल भर 35 किमी दूर जाकर भी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया है। वे पिछले दो सालों से केवरामुंडा स्कूल में रोजाना नि:शुल्क पढ़ा रहे हैं।

जिन्हें पढ़ाया उनके बच्चे भी आतें हैं पढऩे
संतोष इतने लंबे समय से लोगों को पढ़ा रहें है, कि अब तो उनके क्लास की स्थिति ऐसी है कि जिन लोगों को उन्होंने पढ़ाया था, अब उनके बच्चें भी उनके यहां पढ़ाई के लिए आ रहे हैं।

सात बार किया एमए
आम तौर पर लोग ग्रेजुएशन और पीजी करने के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं, लेकिन रोजाना घर में सुबह व शाम बच्चों की क्लास उसके बाद इंजीनियरिंग कॉलेज में जॉब के बाद भी संतोष ने पढ़ाई नहीं छोड़ी है, और अब तक वह सात बार एम. ए कर चुके हैं।

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