सीएम के आदेश का उल्लंघन, बेखौफ खनन, ओवरलोड हाइवा पर सिर्फ रॉयल्टी की कार्रवाई

रायपुर जिले के आरंग थाने में ३२ हाइवा कार्रवाई के लिए खड़े किए गए हैं। सभी को अवैध परिवहन के तहत माइनिंग विभाग कार्रवाई करके छोडऩे की फिराक में है। जबकि सभी हाइवा में तय क्षमता से अधिक खनिज लदा था। कायदे से उनपर ओवरलोडिंग की कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

By: Karunakant Chaubey

Published: 22 Jun 2020, 03:50 PM IST

रायपुर. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से रेत के खनन पर रोक लगाए जाने के बावजूद क्षेत्र में रेत घाटों में दिन-रात खनन किया जा रहा है। शनिवार को रेत माफियाओं द्वारा जिला पंचायत सदस्य पर हमला करने की घटना सामने आई थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद कुछ जगहों पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन महज दिखावे के लिए।

रायपुर जिले के आरंग थाने में ३२ हाइवा कार्रवाई के लिए खड़े किए गए हैं। सभी को अवैध परिवहन के तहत माइनिंग विभाग कार्रवाई करके छोडऩे की फिराक में है। जबकि सभी हाइवा में तय क्षमता से अधिक खनिज लदा था। कायदे से उनपर ओवरलोडिंग की कार्रवाई भी की जानी चाहिए। यदि एक हाइवा पर ओवरलोड की कार्रवाई की जाती है तो ५५ से 60 हजार रुपए अतिरिक्त जुर्माना शासन को मिलेगा। लेकिन, परिवहन और खनिज विभाग के तालमेल नहीं होने का फायदा अवैध खनिज परिवहन करने वालों को मिलता है।

कार्रवाई के पहले ही खाली हो गए रेत घाट

कार्रवाई के पहले ही जिले के रेत माफियाओं को इसकी भनक लग गई थी। होने वाली कार्रवाई की जानकारी खुद खनिज विभाग के सूत्रों ने माइनिंग माफिया को दे दी। जिसके बाद रेत घाटों से चेन माउंटिंग मशीनें गायब हो गईं। ट्रक भी घाटों में दिखाई नहीं दिए। इसके बाद फिर रविवार रात से खनन शुरू हो गया है।

पर्यावरण अनुमति भी एक्सपायर

पूर्व में रेत घाटों का ठेका लेने वाली कंपनियों को पर्यावरण की अनुमति का प्रमाण पत्र भी अब एक्सपायर हो गया है। रेत तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि सीएम के कड़े रुख और एनजीटी के आदेशों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। इधर, अवैध खनन होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन के साथ ही खनिज विभाग का अमला संबंधित ठेका कंपनियों समेत उत्खननकर्ताओं पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

15 अक्टूबर तक रोक

एनजीटी द्वारा प्रदेश सरकार के नए रेत नियमों के तहत १० जून से १५ अक्टूबर तक खनन करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस मामले में ठेका लेने वाली कंपनियों को पर्यावरण की अनुमति का प्रमाण पत्र अब एक्सपायरी हो गया है।

खनन पर प्रतिबंध

एनजीटी द्वारा पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कंपनी को पर्यावरण का प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। वर्तमान में रेत का उत्खनन बेतरतीब तरीके से किया जा रहा था। रेत खनन माफियाओं द्वारा आदेश की अवहेलना की गई। मंगलवार को एनजीटी ने रेत के खनन पर रोक लगाए जाने के निर्देश जारी कर दिए थे। रेत खनन को लेकर रात में रायल्टी जारी करना एनजीटी के आदेश के अलावा कलेक्टर के आदेश की भी अवहेलना है।

इन रेत घाटों में बेखौफ उत्खनन

पारागांव, कागदेही, हरदीडीह, कुरुद, कुटेला, बडग़ांव रेत घाट में खुलेआम खनन का काम चल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि अवैध खनन खुलेआम दिन-रात जारी है। माइनिंग चौकियों पर भी इन्हें रोका नहीं जाता है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हम लगातार निगरानी कर रहे हैं। जो लोग भी रेत घाट में खनन व परिवहन कर रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

- हरिकेश मारवाह, जिला खनिज अधिकारी, रायपुर

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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