बेसहारा अम्मा के अंतिम समय में बने सहारा

- निधन होने पर मातृवत सम्मान के साथ किया अंतिम संस्कार।
- नगर के लोगों ने पेश की मानवता की मिसाल।

रायसेन. किसी बेसहारा का सहारा बनकर जरूरत के समय उसकी सेवा करने से बड़ा पुण्य का काम कोई नहीं, यह पुण्य और मानवता की मिसाल पेश करते हुए नगर के कुछ युवाओं ने एक बुजुर्ग अम्मा की अंतिम समय तक सेवा की। जब उनका देहांत हो गया तो मातृवत अंतिम संस्कार भी किया।
नगर के यशवंत नगर में सालों से रह रही एक विक्षिप्त बुजुर्ग महिला लगभग चार माह पहले पैर में चोट के चलते बीमार हो गई थी। उसे तकलीफ में देश युवा समाजसेवी दिनेश अग्रवाल और ज्ञानी कुशवाह ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। तब से वे हर दिन मां की सेवा कर रहे थे। अपने घर से लाकर भोजन कराने के साथ सुबह शाम उनको दवाएं देने और हाल जानने अस्पताल जाते थे। यशवंत नगर में रहते लोग उन्हे हर दिन भोजन देते थे। सभी का उनके प्रति लगाव हो गया था। किसी अंजान प्रदेश से सालों पहले रायसेन पहुंची अम्मा हिंदी नहीं समझती थीं, न बोल पाती थीं। शुक्रवार को इलाज के दौरान जिला अस्पताल में ही उनका निधन हो गया। यह खबर सोशल मीडिया के जरिए शहर के सभी लोगों तक पहुंची। शनिवार को सुबह अम्मा का पुरेन तालाब वाले शमशान घाट पर पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। अंतिम संस्कार की सारी रश्मे अदा की गईं। इससे पहले कोतवाली पुलिस को भी अम्मा के निधन और अंतिम संस्कार करने के संबेध में सूचना दी गई।
अम्मा के बहाने शहर की मानवीय सेवा की संस्कृति की झलक फिर सामने आई है। बेसहारा का सहारा बनने और लाचार की मदद करने और बुजुर्गों का पूरा सम्मान करने की मिसाल नई पीढ़ी को सीख दे गई।
मनोज यादव करेंगे अस्थियों का विसर्जन
अंतिम संस्कार के समय मौजूद मनोज यादव ने कहा कि वे अम्मा की अस्थियों का संकलन कर नर्मदा और गंगा में विसर्जन करने जाएंगे। एक पुत्र की तरह अपना मुंडन कराने के साथ अंतिम संस्कार की बाकी सभी रस्मे पूरी करेंगे।

बेसहारा अम्मा के अंतिम समय में बने सहारा
praveen shrivastava Bureau Incharge
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