जगह-जगह कचरे के ढेर, नालियां चौक, गंदगी ऐसी कि संक्रमण होना तय और हम शपथ लेकर, फोटो सेशन से भगा रहे कोरोना!

ऐसे कैसे हम कोरोना से लडेंगे?
जिला प्रशासन की तैयारी फोटो सेशन, सावधानियां बरतने की अपील तक सीमित, जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा काम

By: Rajesh Kumar Vishwakarma

Published: 19 Mar 2020, 06:00 AM IST

ब्यावरा.कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक आज की स्थिति में हमारा सिस्टम हो गया है। जिस कोरोना से लडऩे के लिए तमाम प्रकार की तैयारियां देशभर में की जा रही है, सतर्कता बरतने के साथ ही सफाई पर हर ओर ध्यान दिया जा रहा है वहीं, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय निकाय, प्रशासन सहित अन्य जिम्मेदार शपथ लेकर फोटो सेशन में लगे हुए हैं। जमीनी स्तर पर स्वच्छता पर कोई काम नहीं हो पा रहा है।
स्वच्छता सर्वेक्षण-२०२० के खत्म हो जाने के बाद किसी का ध्यान न नालियों की सफाई पर जा रहा है न ही कचरे के ढेर पर। यहां तक कि पानी की टंकियों के आस-पास भी गंदगी जमा है। जल स्त्रोत भी इन्फेक्शन के दायरे में है। गंदगी और कचरे के ढेर में इस कदर की गंदगी है कि संक्रमण होना लगभग तय है। खास बात यह है कि विभागीय जिम्मेदार महज अपील करने में जुटे हैं, कोई फोटो खिंचवाकर शपथ दिलवा रहा है तो कोई मॉस्क लगाकर सतर्कता बरत रहे लेकिन जमीनी स्तर पर न आम दिनों में कुछ हो पाया और न ही अब जब कि कोरोना को संक्रमित बीमारी घोषित किया जा चुका है।

ऐसे समझें गंदगी का दायरा, जिससे हर कदम खतरा है
जल स्त्रोतों के पास गंदगी : शहर में करीब 20 फीसदी आबादी खुले नल, ट्यूबवेल और टंकियों के भरोसे हैं। इन टंकियों के आस-पास की स्थिति यह है कि यहां नालियों का पानी बहता रहा है, आम तौर पर होने वाली सफाई भी नहीं होती।
रिहाइशी इलाके के पास गंदा नाला : जूना ब्यावरा, सुभाष चौक, माता मंड से होकर अजनार नदी तक पहुंचने वाले गंदे नाले से भी बीमारी का खतरा बना हुआ है। इसके आस-पास रिहायशी इलाका है जहां सर्वाधिक दिक्कत लंबे समय से है। इस स्थायी समस्या का कोई हल जिम्मेदार नहीं निकाल पाए हैं।
कचरे के ढेर और चौक नालियां : शहर में अधिकतर नालियां ऐसी है जिनकी नियमित सफाई नहीं हो पातीं, इसका नतीजा यह है कि इनमें दिनभर गंदगी बाहर आ जाती है। साथ ही कचरे के ढेर से पनपने वाले मक्खी-मच्छर घरों तक पहुंचते हैं जिनसे बीमारियों का खतरा होना लगभग तय है।
अधूरी नालियों से ओव्हरफ्लो गंदगी : शहर में बनाए गए न्यू एबी रोड, डिवाइडर वाले रोड सहित अन्य शहर के वार्डों में बने आधे-अधूरे रोड की अधूरी नालियों से ओव्हरफ्लो होने वाली गंदगी भी बीमारियों की मुख्य वजह है। यहां सफाई तो दूर निकासी तक प्रॉपर नहीं हो पाती है।
पब्लिक टॉयलेट में जमा गंदगी : सुलभ शौचालयों के साथ ही जगह-जगह बनाए गए पब्लिक टॉयलेट भी इन्फेक्शन की एक बड़ी वजह है। खास बात यह है कि इन पब्लिक टॉयलेट की नियमित तो दूर साप्तहिक सफाई भी नहीं हो पाती। नजीता इनसे यूरिन इन्फेक्शन का खतरा बना हुआ है।

पत्रिका व्यू : क्या फोटो सेशन से दूर हो जाएगा कोरोना?
शहर ही नहीं जिलेभर की नगरीय निकायों की स्थिति लगभग ऐसी है। ऐसे में क्या वाकई कलेक्टर के सोशल मीडिया पर अपील कर लेने, हमारे रोजाना हाथ आगे कर शपथ ले लेने और मुंह पर मॉस्क लगा लेने से हम समस्या से लड़ लेंगे? या फिर जमीनी स्तर पर सफाई और अन्य तरह से अलर्ट होने की जरूरत है। जिला प्रशासन के जिम्मेदार के तौर पर पदस्थ कलेक्टर इतने गंभीर मुद्दों पर तक मीडिया से बात नहीं करतीं। अन्य जिम्मेदार भी भगवान भरोसे हैं, क्या वाकई हम ऐसे कोरोना से लड़ पाएंगे?
जमीनी स्तर पर काम करेंगे
वैसे हम हर दिन मॉनीटरिंग करते हैं, हमने टीम को अलर्ट किया भी है लेकिन हम जनता से भी अपील करेंगे कि सफाई को लेकर कोऑपरेट करे।
-इकरार अहमद, सीएमओ, नपा, ब्यावरा
नपा से साथ मिलकर करवाएंगे सफाई
शहर के प्रमुख ऐसे पाइंट्स को चिह्नित कर लेने के बाद हम नपा के साथ मिलकर इस पर काम करेंगे। प्रशासनिक के साथ ही यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।
-संदीप अस्थाना, एसडीएम, ब्यावरा

Rajesh Kumar Vishwakarma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned