झमाझम लगातार बारिश होने से नदियां उफान पर, छलके बैराज, मोंगरा सहित सभी बैराजों के खोले गए गेट ...

खातूटोला बैराज से छोड़ा गया पानी सूखानाला बैराज पहुंच चुका था जिसके बाद से यहां गेट और भी खोले जाने की संभावना है। वहीं इन सभी बैराजों का पानी सहायक नदियों से होते हुए नगर के समीप ही शिवनाथ नदी में मिल रही हैं।

By: Nitin Dongre

Published: 22 Aug 2020, 09:23 AM IST

डोंगरगांव. सूखे सावन के बाद भांदो की झड़ी ने क्षेत्र की नदियों को उफान पर ला दिया है। वहीं क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोंगरा सहित सभी चार बैरॉज अपने अधिकतम जल स्तर पर हैं। वहीं ऊपरी आवक भी लगातार बने रहने के कारण सभी बैरॉज से पानी छोड़े जाने की खबर है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मोंगरा बैरॉज से शुक्रवार सुबह 16 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। वहीं बैरॉज में आवक के बढ़ते क्रम को देखते हुए दोपहर 2 बजे इसे बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

इसी प्रकार समीपस्थ सूखानाला बैरॉज से दो गेटों के माध्यम से 35 सौ क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जबकि घुमरिया व खातूटोला बैरॉज से क्रमश: 25सौ व 24 सौ क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, इसके चलते शिवनाथ व उसकी सहायक नदियां सूखानाला व घुमरिया नदी पूरे ऊफान पर है। इससे क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो रही है। हालॉकि अभी बैरॉजों सेे छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा स्थिर है, परन्तु महाराष्ट्र व ऊपरी भाग में अधिक बारिश होने से इसमें बढ़ोतरी की संभावना है।

जानिए बैराजों की स्थिति

बीते वर्ष इन दिनों सूखे की मार झेल रहे बैराजों में 60 फीसदी से भी कम था। वहीं इस वर्ष यह जल स्तर अपने अधिकतम भराव क्षमता तक पहुंच चुका है। स्थिति यह है कि सभी बैराजों से पानी छोड़ा जा रहा है। ज्ञात हो कि मोंगरा बैरॉज में शुक्रवार को 80 प्रतिशत जलभराव पहुंच चुका था। वहीं सूखा नाला में यह आंकड़ा 86 प्रतिशत को पार कर गया है। जबकि घुमरिया बैरॉज में 87 प्रतिशत वहीं खातूटोला में अधिकतम 60 प्रतिशत में से 57 प्रतिशत पानी का जमाव हो चुका है। समाचार लिखे जाने तक सभी बैराजों से पानी छोड़े जा रहे थे। खातूटोला बैरॉज से छोड़ा गया पानी सूखानाला बैराज पहुंच चुका था जिसके बाद से यहां गेट और भी खोले जाने की संभावना है। वहीं इन सभी बैरॉजों का पानी सहायक नदियों से होते हुए नगर के समीप ही शिवनाथ नदी में मिल रही हैं, जिसके कारण निचले हिस्सों में अत्यधिक बाढ़ की स्थिति निर्मित हो सकती है। इधर किसानों ने बताया कि प्रशासन को बैरॉज से पानी छोड़े जाने की सूचना मुनादी व अन्य संसाधनों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र में दिया जाना चाहिए।

Nitin Dongre Desk
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