यह है बिना फौव्वारे का डोंगरगांव का फौव्वारा चौक, पढि़ए पूरी खबर

यह है बिना फौव्वारे का डोंगरगांव का फौव्वारा चौक, पढि़ए पूरी खबर

Govind Sahu | Publish: Apr, 17 2018 08:30:10 PM (IST) Rajnandgaon, Chhattisgarh, India

शहर के रहवासियों को शीतलता व सुंदरता प्रदान करने वाले सभी फव्वारे आज वीरान पड़े हैं। देख-रेख के अभाव फव्वारे दम तोड़ते रहे हैं।

राजनांदगांव/डोंगरगांव. शहर के रहवासियों को शीतलता व सुंदरता प्रदान करने वाले सभी फव्वारे आज वीरान पड़े हैं। कभी नगरवासी शौक से इन फव्वारों के आस-पास टहलते व बैठे दोस्तों के साथ गप्पे लड़ाते थे, किन्तु आज इन फव्वारों पर वीरानी छाई हुई है। कुल मिलाकर यह कहा जाए कि देख-रेख के अभाव और नगर पंचायत की उदासीनता के चलते ये फव्वारे दम तोड़ते जा रहे हैं।

नगर पंचायत ने तो कोई ध्यान नहीं दिया

ज्ञात हो कि डोंगरगांव नगर पंचायत अंतर्गत तीन फव्वारों का निर्माण लाखों रुपए लगाकर करवाया गया था। वहीं नगर के एक चौक का नाम ही फव्वारे के कारण फव्वारा चौक रखा गया है। इन फव्वारों को बचाने या देख-रेख के लिए नगर पंचायत न तो कोई ध्यान नहीं दिया। यहां तक कि आम जनता के हित और खुशी की बात करने वाले पक्ष-विपक्ष के नेता भी अनजान बने रहे।

फव्वारा नंबर एक
शहर के नए बस स्टैंड के मोड़ में बना फव्वारा जो कभी नगर के रहवासी सहित आए मेहमानों को यहां घुमाने और दिनभर की थकान दूर करने का एक उत्तम स्थान हुआ करता था, किंतु नगर पंचायत प्रशासन की उदासीनता के चलते अब यह वीरान पड़ा है। गर्मी आने से कुछ महीने पूर्व यह स्थान मूत्रालय में तब्दील हो चुका था।

फव्वारा नंबर दो
नगर के स्टेट बैंक जाने वाले तिराहे में बना फव्वारा कभी नगर का आकर्षण केंद्र हुआ करता था। अन्य सामान्य दिनों के साथ-साथ भगवान गणेश, मां दुर्गा और सरस्वती स्थापना के समय यह स्थान काफी मनभावन हुआ करता था। अतिथि तारीफ करते थकते नहीं थे, किन्तु नगर पंचायत की इस ओर दिलचस्पी नहीं होने के चलते आज यह फव्वारा अवशेष में बदल चुका है।

फव्वारा नंबर तीन
शहर के नगर पंचायत परिसर में मॉडर्न स्टाइल और फैंसी व रंग-बिरंगी लाइट की चकाचौंध के साथ लाखों रुपए के खर्च के बाद बना छोटा-सा गाडन जो मनमोहक लाइट और फव्वारे से सुसज्जित था। अब यह स्थान कचरा गाड़ी पार्किंग में तब्दील हो गया है। चलो मान लिया जाए कि शहर के अन्य फव्वारों को देखने का समय नगर पंचायत के अधिकारियों के पास नहीं था किंतु यह छोटा सा गार्डन जो खुद निकाय के अधिकारियों और पदाधिकारियों की देख-रेख में बना था, नगर पंचायत उसे भी सुरक्षित बचा पाने नाकाम साबित हो रही है।

यह स्थान बेरंग और बदहाल

जब यह गार्डन आम जनता के लिए खोला गया था, तब शहरवासी अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और बच्चों के साथ समय बिताने आया करते थे, किंतु आज यह स्थान बेरंग और बदहाल पड़ा है, जो नगर पंचायत की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है तथा नगर पंचायत के विकास की प्लानिंग और कार्यप्रणाली को भी दर्शाता है।

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